वज़न5 मिनट
सचेत होकर खाना और ‘तीन-चौथाई पेट’ का नियम
कैसे खाते हैं, यह उतना ही मायने रखता है जितना क्या खाते हैं। आयुर्वेद की पुरानी सलाह — बैठकर, बिना ध्यान भटकाए खाएँ, अच्छी तरह चबाएँ और पेट लगभग तीन-चौथाई भरने पर रुक जाएँ — वज़न नियंत्रण और बेहतर पाचन का सबसे आसान औज़ार है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथ सुझाते हैं कि पेट का आधा हिस्सा ठोस भोजन से, एक-चौथाई तरल से भरें, और एक-चौथाई पाचन के लिए ख़ाली छोड़ें। वे सुखद जगह पर, सही समय पर, न बहुत जल्दी न बहुत धीरे, और भोजन पर ध्यान रखकर खाने की बात भी करते हैं। सचेत भोजन पर आधुनिक शोध भी यही कहता है: जो लोग धीरे और बिना स्क्रीन के खाते हैं, वे कम खाते हैं और खाने का ज़्यादा आनंद लेते हैं।
सामग्री
- थाली में आपका सामान्य भोजन (परोसने के बर्तन से सीधे नहीं)
- एक गिलास गुनगुना पानी
- बिना स्क्रीन के 20 मिनट
बनाने की विधि
- थाली में संतुलित मात्रा परोसें — आधी सब्ज़ी, एक-चौथाई दाल या प्रोटीन, एक-चौथाई रोटी या चावल।
- फ़ोन दूर रखें और टीवी बंद करें।
इस्तेमाल का तरीका
- खाने से पहले एक साँस रुककर देखें कि असल में कितनी भूख है।
- हर कौर अच्छी तरह चबाएँ और कौरों के बीच चम्मच या रोटी नीचे रख दें।
- खाने के साथ बड़े गिलास ठंडा पानी पीने के बजाय थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी लें।
- आराम से संतुष्ट होने पर रुकें, ठसाठस भरने पर नहीं। दोबारा लेने का फ़ैसला करने से पहले 10 मिनट रुकें।
मददगार आदतें
- छोटी थाली इस्तेमाल करें।
- सबसे बड़ा भोजन दोपहर में करें और रात का खाना हल्का रखें।
- खाने के बाद लेटने के बजाय थोड़ा टहलें।
सावधानियाँ
- सचेत भोजन पाबंदी के बारे में नहीं है — अगर खाने को लेकर घबराहट, भोजन छोड़ना, ज़रूरत से बहुत ज़्यादा खाना या उल्टी करना दिखे तो डॉक्टर या काउंसलर से बात करें।
- इंसुलिन या शुगर घटाने वाली गोलियाँ लेने वाले डायबिटीज़ के मरीज़ डॉक्टर की सलाह के बिना भोजन बहुत कम न करें।





