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खाने के बाद बेल पत्र की हल्की चाय

तीन-चार ताज़े बेल पत्तों का हल्का काढ़ा, शुगर संभालने वालों के लिए उत्तर और पूर्वी भारत का पारंपरिक पेय।

कटोरी, गिलास और पारंपरिक बर्तनों का आयुर्वेदिक रसोई चित्र।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

भारतीय घरों में बेल

बेल सख़्त छिलके वाला फल है जिसका गूदा खुशबूदार और नारंगी होता है, और यह शिव जी को प्रिय माना जाता है। आयुर्वेद कच्चे बेल को दस्त में और पके बेल को गर्मी के ठंडे खाने के रूप में इस्तेमाल करता है।

बेल पत्र शिव पूजा में चढ़ाए जाते हैं और लोक चिकित्सा में डायबिटीज़ के लिए इस्तेमाल होते हैं। जानवरों पर अध्ययन और इंसानों पर कुछ छोटी रिपोर्टें हल्के शुगर घटाने वाले असर बताती हैं। हल्का काढ़ा सौम्य, बिना चीनी का पेय है।

सामग्री

  • 3 से 4 ताज़े बेल पत्र
  • 1½ कप पानी

बनाने की विधि

  1. पत्ते धोएँ, तोड़ें और पाँच मिनट उबालें; छान लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • हफ़्ते में कुछ बार खाने के बाद पिएँ।

मददगार आदतें

  • पका बेल थपथपाने पर खोखला सुनाई देता है और मीठी खुशबू आती है।

सावधानियाँ

  • दवा ले रहे हों तो शुगर जाँचें। गर्भावस्था में न लें।
  • ज़्यादा पका बेल खाने से कब्ज़ हो सकती है।
  • शुगर की जाँच करते रहें; इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर को बताएँ, दवा की मात्रा देखनी पड़ सकती है।
  • अगर आप नियमित दवा लेते हैं या कोई पुरानी बीमारी है, तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सूखा बेल पत्र पाउडर ले सकते हैं?

वैद्य की सलाह पर सिर्फ़ थोड़ी मात्रा में।

क्या बेल का फल भी शुगर में मदद करता है?

पका फल मीठा होता है; थोड़ी मात्रा में खाएँ।

क्या बेल का मुरब्बा बहुत मीठा होता है?

हाँ, इसलिए एक छोटा टुकड़ा ही लें।