सर्दी-खाँसी10 मिनट
तुलसी और नमक का गरारा
तुलसी के पत्ते चुटकी भर नमक के साथ उबालकर गुनगुने होने पर गरारा किया जाता है और पानी थूक दिया जाता है। यह गले की कुल्ला है, पीने का पानी नहीं। जो गरारा सुरक्षित न कर सके उन्हें न दें।

गुनगुना तुलसी और नमक का गरारा
कुछ तुलसी के पत्ते और नमक की चुटकी पानी में उबालकर, गुनगुना होने पर सादा गरारा बनता है। नमक चुटकी ही रहे। पानी गले तक जाता है, फिर थूक दिया जाता है। निगलना इस आदत में नहीं है।
जो बच्चे गरारा करके थूक नहीं सकते, उन्हें यह न दें। खरोंच वाला गला आराम से हल्का हो सकता है, पर खांसी कुछ दिनों से ज्यादा रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
सामग्री
- 8 से 10 ताज़े तुलसी के पत्ते
- नमक की एक चुटकी
- 1 कप पीने का पानी
बनाने की विधि
- तुलसी के पत्ते पानी में नमक की चुटकी के साथ कुछ मिनट उबालें।
- पानी गुनगुना होने दें, गरारा करें और थूक दें। निगलें नहीं।
इस्तेमाल का तरीका
- दिन में एक या दो बार गुनगुने पानी से गरारा करें।
- हर घूँट थूक दें।
- जो ठीक से थूक न सके, उसे यह गरारा न दें।
मददगार आदतें
- पानी अभी गर्म हो तो रुकें। गला जलना मदद नहीं करता।
- नमक की ताज़ी चुटकी काफी है। बहुत नमकीन पानी ज़रूरत से तीखा है।
सावधानियाँ
- गरारे का पानी थूक दें। यह पीने के लिए नहीं।
- छोटे बच्चों को न दें जो गरारा सुरक्षित न कर सकें।
- खांसी कुछ दिनों से ज्यादा रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या तुलसी और नमक का पानी निगल लें?
- नहीं। गुनगुना होकर गरारा करें, फिर थूक दें।
क्या छोटा बच्चा यह गरारा कर सकता है?
- नहीं। जो गरारा करके सुरक्षित थूक न सके, उसे न दें।
खांसी कब दिखाएँ?
- खांसी कुछ दिनों से आगे रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ। यह गरारा केवल छोटा कुल्ला है।




