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कोहनी में दर्द के घरेलू उपाय: खिंचाव से आराम, बर्फ़, गुनगुना तेल और बाँह के स्ट्रेच
कोहनी का दर्द अक्सर एक ही हरकत बार-बार करने से होता है — टाइपिंग, थैले उठाना, झाड़ू लगाना, कपड़े निचोड़ना या रैकेट वाले खेल। कोहनी में दर्द के ये घरेलू उपाय नसों (टेंडन) को शांत होने का मौक़ा देते हैं: खिंचाव वाले काम से आराम, दर्द बढ़ने पर बर्फ़, बाँह पर गुनगुने तेल की मालिश और हल्के स्ट्रेच।

कोहनी में दर्द क्यों होता है
सबसे आम कारण कोहनी के आसपास टेंडन में जलन है — बाहरी तरफ़ टेनिस एल्बो या अंदरूनी तरफ़ गोल्फ़र एल्बो — बार-बार पकड़ने और घुमाने से। चोट, गठिया और नस में जलन दूसरे कारण हैं।
दर्द वाले जोड़ों पर गुनगुने तिल तेल की मालिश और हल्दी-अदरक की चाय भारतीय घरों के पारंपरिक सहारे हैं।
सामग्री
- कपड़े में लिपटी बर्फ़
- 1 बड़ा चम्मच गुनगुना तिल का तेल
- चाय के लिए अदरक और हल्दी
बनाने की विधि
- बर्फ़ को पतले तौलिये में लपेटें।
- अदरक और ताज़ी हल्दी की कुछ फाँकें (या आधा छोटा चम्मच पाउडर) 2 कप पानी में 5 मिनट उबालें; छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- काम के बाद या दर्द बढ़ने पर दर्द वाली जगह पर 10–15 मिनट बर्फ़ लगाएँ।
- रोज़ 5–10 मिनट गुनगुने तेल से बाँह की मांसपेशियों की मालिश करें (दर्द वाली हड्डी पर नहीं)।
- स्ट्रेच: बाँह सीधी, हथेली नीचे, दूसरे हाथ से कलाई को 20 सेकंड धीरे नीचे मोड़ें, 3 बार, दिन में दो बार। दिन में एक बार चाय पिएँ।
मददगार आदतें
- उठाने का तरीक़ा बदलें: हथेली ऊपर, चीज़ शरीर के पास।
- टाइपिंग के बीच ब्रेक लें और ढीली पकड़ रखें।
- काम करते समय बाँह की पट्टी (टेनिस एल्बो बैंड) मदद कर सकती है।
सावधानियाँ
- बहुत दर्द वाली या सूजी जगह पर सीधे मालिश न करें।
- ख़ून पतला करने की दवा या पित्ताशय की पथरी हो तो ज़्यादा हल्दी ठीक नहीं हो सकती।
- गिरने के बाद दर्द, सूजी या गरम कोहनी, उँगलियों में सुन्नपन या झनझनाहट, या 2–3 हफ़्ते से ज़्यादा दर्द रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कोहनी का दर्द घर पर कैसे ठीक करें?
- दर्द बढ़ाने वाली हरकत से आराम दें, दर्द बढ़ने पर बर्फ़ लगाएँ, गुनगुने तेल से बाँह की मालिश करें और हल्के स्ट्रेच करें।
कोहनी के बाहरी हिस्से में दर्द क्यों होता है?
- अक्सर टेनिस एल्बो — बार-बार पकड़ने और घुमाने से टेंडन में जलन, टेनिस खेले बिना भी।
टेनिस एल्बो ठीक होने में कितना समय लगता है?
- कुछ हफ़्तों से कुछ महीने तक लग सकते हैं। जल्दी आराम और काम का तरीक़ा बदलने से यह जल्दी शांत होता है।






