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मुँह के छालों के लिए खदिर (कत्था): क्या जानें

खैर के पेड़ से बना कत्था मुँह के छालों पर लगाने का पारंपरिक उपाय है। कैसे लगाएँ, क्यों चुभता है, और छाले में कब डॉक्टर ज़रूरी है।

चित्र में शहद की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

खदिर (कत्था) के बारे में ज़रूरी बातें

खदिर कत्थे का पेड़ है; इसका अर्क, कत्था, पान में लगने वाला भूरा लेप है। आयुर्वेद इसे मुँह और मसूड़ों के लिए कसैले उपाय के रूप में इस्तेमाल करता है।

खदिर बहुत कसैला अर्क है जो पान में और खदिरादि वटी जैसी आयुर्वेदिक मुँह की दवाओं में इस्तेमाल होता है। छाले पर बहुत थोड़ा लगाने से उसका कच्चापन कम लग सकता है। ज़्यादातर छाले एक से दो हफ़्ते में भर जाते हैं।

सामग्री

  • चुटकी भर शुद्ध कत्था पाउडर
  • एक बूँद पानी या शहद

बनाने की विधि

  1. पानी या शहद के साथ बहुत थोड़ा लेप बनाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • साफ़ रुई की तीली से दिन में एक-दो बार छाले पर लगाएँ; 20 मिनट कुछ न खाएँ।
  • भरने तक नरम, बिना मसाले का खाना खाएँ।

मददगार आदतें

  • भरोसेमंद दुकान से शुद्ध कत्थे के टुकड़े लें।

सावधानियाँ

  • थोड़ी देर चुभता है। पान और तंबाकू से बचें। दो हफ़्ते से ज़्यादा रहने वाला छाला, या बिना दर्द का सफ़ेद या लाल धब्बा हो तो डॉक्टर या दाँतों के डॉक्टर को दिखाएँ।
  • सुपारी या तंबाकू वाला पान मुँह के कैंसर का ख़तरा बढ़ाता है; कत्था अकेले और कम ही इस्तेमाल करें।
  • दिन में दो बार ब्रश करते रहें; दर्द, सूजन या दो हफ़्ते से ज़्यादा रहने वाले छाले पर डेंटिस्ट को दिखाएँ।
  • यह पारंपरिक इस्तेमाल है; वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कत्था और पान मसाला एक ही हैं?

नहीं; पान मसाला और गुटखा नुकसानदेह हैं। सिर्फ़ शुद्ध कत्था लें।

क्या खदिरादि वटी ले सकते हैं?

हाँ, लेबल की मात्रा में चूसने वाली गोली की तरह।

क्या कत्था निगलना सुरक्षित है?

पान में थोड़ी मात्रा आम है; इसे सप्लीमेंट की तरह न लें।