त्वचा15 मिनट
सर्दियों की रूखी त्वचा के लिए मलाई, तेल और गुनगुने स्नान की दिनचर्या
सर्दियों में खिंची, पपड़ीदार, खुजली वाली त्वचा वात असंतुलन का सीधा उदाहरण है। चेहरे पर ताज़ी मलाई, नहाने से पहले तेल की छोटी-सी मालिश और गरम नहीं बल्कि गुनगुना पानी — कुछ ही दिनों में फ़र्क़ दिख सकता है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
वात ठंडा, सूखा और रूखा होता है — ठीक वैसा ही असर जो सर्दी की हवा, गरम पानी से नहाना और तेज़ साबुन त्वचा पर डालते हैं। आयुर्वेद का रोज़ का अभ्यंग (तेल मालिश) इसी का जवाब है, और भारतीय घरों में मलाई लंबे समय से चेहरा मुलायम करने के काम आती रही है। तर्क सीधा है: मौसम जो चिकनाई और नमी छीनता है उसे लौटाएँ, और बची हुई को न धोएँ।
सामग्री
- 1 छोटा चम्मच ताज़ी मलाई, चाहें तो चुटकी भर हल्दी के साथ
- शरीर के लिए 1–2 बड़े चम्मच तिल, नारियल या बादाम तेल
- हल्का, बिना साबुन वाला क्लींज़र या बेसन-दूध का लेप
बनाने की विधि
- मलाई 10 मिनट पहले फ्रिज से निकाल लें ताकि बर्फ़ जैसी ठंडी न रहे।
- तेल की शीशी गरम पानी में रखकर हल्का गुनगुना कर लें।
इस्तेमाल का तरीका
- चेहरा: 2–3 मिनट हल्के हाथ से मलाई की मालिश करें, 10 मिनट छोड़ें, फिर गुनगुने पानी से धो लें। एक दिन छोड़कर करें।
- शरीर: नहाने से 15–20 मिनट पहले बाँहों, पैरों और पीठ पर गुनगुना तेल मलें।
- गुनगुने पानी से नहाएँ, थपथपाकर पोंछें और त्वचा हल्की नम रहते ही थोड़ा तेल या मॉइस्चराइज़र लगाएँ।
मददगार आदतें
- स्नान छोटा रखें और पानी बहुत गरम न हो।
- सर्दियों के खाने में गुनगुना पानी, घी, तिल, मेवे और मौसमी सब्ज़ियाँ शामिल करें।
- ऊनी कपड़ों से खुजली हो तो नीचे सूती कपड़ा पहनें।
सावधानियाँ
- मुँहासे वाली या तैलीय त्वचा पर मलाई रोमछिद्र बंद कर सकती है — चेहरे पर एलोवेरा जेल लगाएँ।
- मेवों से एलर्जी हो तो बादाम तेल न लगाएँ।
- बहुत खुजली वाले, फटे, लाल या रिसते हुए धब्बे एक्ज़िमा या फंगल संक्रमण हो सकते हैं — तेल लगाने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ को दिखाएँ।





