मुँह की देखभाल5 मिनट
पारंपरिक नीम या बबूल की दातुन
टूथपेस्ट से पहले भारत का बड़ा हिस्सा नीम या बबूल की ताज़ी टहनी से दाँत साफ़ करता था। सही तरीके से इस्तेमाल करें तो दातुन आपकी मुख-चर्या में एक सुखद, बिना कचरे वाला जोड़ है — हालाँकि यह नियमित ब्रश के साथ सबसे अच्छा काम करती है, उसकी जगह नहीं।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद का दंतधावन कड़वे, कसैले या तीखे स्वाद वाले पेड़ों की दातुन की सलाह देता है — जैसे नीम, बबूल, अर्जुन और करंज। सिरा चबाने से वह नरम रेशों वाला ब्रश बन जाता है, और कड़वा रस मुँह को साफ़ और ताज़ा महसूस कराता है। कई ग्रामीण परिवार आज भी रोज़ दातुन करते हैं, और यह परंपरा से फिर जुड़ने का सुंदर तरीका है।
सामग्री
- सड़क से दूर किसी साफ़ पेड़ की नीम या बबूल की ताज़ी, पेंसिल जितनी मोटी, लगभग 15–20 सेमी लंबी टहनी
बनाने की विधि
- टहनी को अच्छी तरह धोएँ। एक सिरे से लगभग 1 सेमी छाल उतार लें।
- उस सिरे को एक मिनट हल्के से चबाएँ, जब तक वह नरम, ब्रश जैसे रेशों में न बदल जाए।
इस्तेमाल का तरीका
- रेशेदार सिरे से दाँतों की बाहरी और अंदरूनी सतह को हल्के ऊपर-नीचे स्ट्रोक से 3–5 मिनट साफ़ करें।
- अच्छी तरह कुल्ला करें। इस्तेमाल हुआ सिरा काट दें और अगली बार नया बनाएँ; हर एक-दो दिन में नई टहनी लें।
- कई लोग सुबह दातुन और रात को फ़्लोराइड टूथपेस्ट के साथ सामान्य ब्रश करते हैं।
मददगार आदतें
- कड़वा स्वाद सामान्य है और कुछ दिनों में आदत हो जाती है।
- पूरी आयुर्वेदिक सुबह के लिए दातुन के साथ जीभ की सफ़ाई और तेल से कुल्ला (ऑयल पुलिंग) करें।
सावधानियाँ
- हल्के हाथ से करें — सख़्त, सूखी टहनी मसूड़ों को चोट पहुँचा सकती है और दाँतों का इनेमल घिस सकती है।
- छोटे बच्चों, ब्रेसेज़ वालों, हिलते दाँतों या संवेदनशील, नीचे खिसकते मसूड़ों वालों के लिए ठीक नहीं।
- अनजान पेड़ों या कीटनाशक छिड़के पेड़ों की टहनी न लें।
- दातुन दंत जाँच का विकल्प नहीं; हर 6–12 महीने में दंत चिकित्सक को दिखाएँ।


