त्वचा10 मिनट
मुँहासों के लिए नीम और हल्दी का लेप
ताज़ी नीम की पत्तियों के लेप में चुटकी भर हल्दी मिलाकर सिर्फ़ दाने पर लगाना, लाल और सूजे मुँहासे को शांत करने का पुराना तरीका है — साथ में हाथ दूर रखना और खान-पान को ठंडा रखना।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद ज़्यादातर मुँहासों (युवान पिडिका, यानी ‘जवानी के दाने’) को गर्मी — ख़ून में बढ़ा पित्त — और रोमछिद्र बंद करने वाले कफ से जोड़ता है। इसलिए उपाय दो स्तर पर होता है: त्वचा पर ठंडी, साफ़ करने वाली जड़ी-बूटियाँ, और अंदर से कम तेल, मसाले और मीठा। नीम कड़वा और ठंडा है और पीढ़ियों से त्वचा पर लगाया जाता है; हल्दी भारतीय घरों की सबसे जानी-मानी त्वचा की जड़ी है।
सामग्री
- 8–10 ताज़ी नीम की पत्तियाँ, धुली हुई (या ½ छोटा चम्मच नीम पाउडर)
- चुटकी भर हल्दी
- कुछ बूँद गुलाब जल या सादा पानी
बनाने की विधि
- नीम की पत्तियों को कुछ बूँद पानी के साथ बारीक पीस लें।
- हल्दी और गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा लेप बना लें।
इस्तेमाल का तरीका
- हल्के क्लींज़र से चेहरा धोकर थपथपाकर सुखाएँ।
- साफ़ कॉटन बड से सिर्फ़ उभरे मुँहासों पर पतली परत लगाएँ; 15–20 मिनट रहने दें।
- ठंडे पानी से धो लें। दिन में एक बार, एक हफ़्ते तक करें।
मददगार आदतें
- दाने न दबाएँ, न नोचें — इससे संक्रमण फैलता है और दाग़ रह जाते हैं।
- तकिये का कवर अक्सर बदलें, फ़ोन की स्क्रीन साफ़ रखें और सोने से पहले मेकअप हटा दें।
- तली चीज़ें, मिठाई और मीठे पेय कम करें; पर्याप्त पानी पिएँ।
सावधानियाँ
- पहले कान के पीछे लगाकर देखें; चुभन, जलन या खुजली हो तो बंद करें।
- गोरी त्वचा और कपड़ों पर हल्दी का पीलापन रह सकता है — बहुत कम मात्रा लें।
- दर्द वाले, गहरे, गाँठ जैसे मुँहासे, दाग़ छोड़ने वाले मुँहासे, या अनियमित माहवारी और चेहरे पर ज़्यादा बालों के साथ मुँहासे हों तो त्वचा रोग विशेषज्ञ को दिखाएँ।
- डॉक्टर की दी हुई तेज़ मुँहासे की क्रीम के साथ बिना पूछे न मिलाएँ।




