महिला स्वास्थ्य15 मिनट
ऐंठन वाले दिन पैरों की गुनगुनी सेंक
पैरों को सेंधा नमक वाले गुनगुने पानी में भिगोएँ, फिर तलवों पर थोड़ा तिल का तेल लगाएँ। ऐंठन वाले दिन की शांत शाम की आदत है, दर्द का इलाज नहीं।

ऐंठन वाली शाम पैर भिगोना
निचला पेट जकड़ा हो तो गुनगुने पानी की परात पैरों को आराम की जगह देती है। सेंधा नमक पानी में रहता है, और तिल का तेल पैर पोंछने के बाद केवल तलवों पर लगता है। इस आदत में कोई दर्दनाशक नहीं।
दस से पंद्रह मिनट काफी हैं। पैर डालने से पहले कलाई पर पानी सुखद लगे। तेज़ दर्द, जल्दी भीगने वाला बहाव, या बुखार के साथ दर्द सेंक का विषय नहीं। चिकित्सा लें।
सामग्री
- 1 बड़ा चम्मच सेंधा नमक
- भिगोने के बाद तलवों के लिए 1 छोटा चम्मच तिल का तेल
- परात में टखनों तक भरने लायक गुनगुना पानी
बनाने की विधि
- सेंधा नमक को गुनगुने पानी में तब तक घोलें जब तक घुल जाए।
- तिल का तेल बाद के लिए अलग रखें, पानी में न मिलाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- ऐंठन वाले दिन सुरक्षित बैठकर दोनों पैर 10 से 15 मिनट भिगोएँ।
- पैर पोंछकर तलवों पर तिल के तेल की कुछ बूँदें मलें।
- परात धो दें। गंदा पानी दोबारा उपयोग न करें।
मददगार आदतें
- परात भरते समय संतुलन बनाने से कुर्सी पास रखना सुरक्षित है।
- तेल सूखे तलवों पर पतली परत है, मुट्ठी भर नहीं।
सावधानियाँ
- पानी कलाई पर जाँचें ताकि गर्म हो, खौलता नहीं।
- पैरों में खुला घाव, सुन्नपन या कम एहसास हो तो सेंक छोड़ दें।
- पैर भिगोना ऐंठन, संक्रमण या अधिक रक्तस्राव का इलाज नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पैर भिगोने से माहवारी की ऐंठन मिटती है?
- नहीं। यह पैरों के आराम की आदत है। दर्द या रक्तस्राव का इलाज नहीं।
तिल का तेल कब लगाएँ?
- भिगोने के बाद, सूखे तलवों पर, कुछ बूँदें। परात में नहीं डालते।
पैर की सेंक किसे नहीं करनी चाहिए?
- खुला घाव, सुन्नपन या पैरों में कम एहसास हो तो छोड़ें। तेज़ दर्द या बुखार पर देखभाल लें।




