मुख्य सामग्री पर जाएँ
AllAyurvedics

घबराहट और दौड़ते विचारों के लिए भ्रामरी प्राणायाम

जब मन रुकने का नाम न ले, तो गुनगुनाकर देखिए। भ्रामरी प्राणायाम — भौंरे की तरह हल्की ‘म्म्म’ आवाज़ के साथ साँस छोड़ना — पाँच मिनट लेता है, कोई सामान नहीं चाहिए, और बहुत लोग इसके बाद साफ़ तौर पर ज़्यादा शांत महसूस करते हैं।

चित्र में बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

भ्रामरी योग परंपरा से आई है और भौंरे (भ्रमर) की गुंजन जैसी आवाज़ के कारण इसका यह नाम है। लंबी, गुनगुनाती साँस छोड़ना अपने-आप साँस धीमी करता है, और सिर व चेहरे में महसूस होने वाला कंपन सुकून देता है। आयुर्वेद घबराहट और ज़्यादा सोचने को बिगड़े वात का संकेत मानता है, और ऐसे धीमे, लयबद्ध अभ्यास उसे शांत करने का शास्त्रीय तरीका हैं। गरम पेय और जल्दी सोने के साथ यह और अच्छा काम करता है।

सामग्री

  • बैठने के लिए एक शांत जगह
  • 5–10 मिनट
  • गद्दी या कुर्सी ताकि कमर आराम से सीधी रहे

बनाने की विधि

  1. रीढ़ सीधी और कंधे ढीले रखकर आराम से बैठें। आँखें बंद करें।
  2. चाहें तो तर्जनी उँगलियाँ हर कान के आगे वाले छोटे उपास्थि के हिस्से पर, या माथे पर हल्के से रखें।

इस्तेमाल का तरीका

  • नाक से धीरे-धीरे साँस लें।
  • मुँह बंद रखकर नाक से धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए भौंरे जैसी एक-सी, हल्की गुंजन करें।
  • 5–10 बार दोहराएँ, फिर एक मिनट शांत बैठकर महसूस करें कि आप कैसा अनुभव कर रहे हैं।
  • सुबह, सोने से पहले, या जब भी मन उलझा लगे, अभ्यास करें।

मददगार आदतें

  • इसके साथ रोज़ 20–30 मिनट टहलें — यह तनाव घटाने के सबसे अच्छे प्राकृतिक तरीकों में से है।
  • सोने से पहले ख़बरें और सोशल मीडिया कम करें, और कल की चिंताएँ काग़ज़ पर लिखकर ‘रख’ दें।
  • किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें; बाँटा हुआ तनाव हल्का होता है।

सावधानियाँ

  • कानों पर ज़ोर से न दबाएँ; गुंजन हल्की रखें। चक्कर आए तो रुक जाएँ।
  • लेटकर अभ्यास न करें और कान के संक्रमण में न करें।
  • साँस के अभ्यास मानसिक स्वास्थ्य में सहायक हैं, पर इलाज की जगह नहीं। घबराहट, पैनिक अटैक, लगातार उदासी या ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने के विचार हों तो डॉक्टर, काउंसलर या भारत में टेली-मानस (14416) जैसी हेल्पलाइन से संपर्क करें।