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भिगोए धनिए का ठंडा पानी, गर्म दोपहर में धीरे-धीरे

जलती दोपहर में पेट खट्टा और बेचैन लग सकता है। रात भर भिगोए धनिए के दाने छानकर दिन में घूँट-घूँट पीना हल्का ठंडा पानी है। उसी कटोरी में थोड़ी सौंफ महक को नरम रखती है।

लकड़ी के तख्ते पर भीगे धनिए के दाने, सौंफ और पानी से भरा काँच का जग

गर्मी में भिगोए धनिए का पानी

धनिए के दाने रोज़ का मसाला हैं, कोई दुर्लभ जड़ी नहीं। रात भर पानी में छोड़ने पर हल्का सुगंधित पेय मिलता है, जिसे कई घर धनिया पानी कहकर जानते हैं। साथ भिगोई सौंफ इसे थोड़ा मीठा और पीने में आसान बनाती है।

आयुर्वेद पित्त की गर्मी की बात करता है, जब शरीर और पेट गर्म, चिड़चिड़े और खट्टे लगें। यह पानी उस गर्म दोपहर के अहसास को शांत कर सकता है। दर्द, न मिटने वाली जलन या पतले दस्त हों तो यह डॉक्टर का विकल्प नहीं है।

सामग्री

  • एक छोटा चम्मच धनिया के दाने
  • दो कप पानी
  • आधा छोटा चम्मच सौंफ

बनाने की विधि

  1. धनिए के दाने और सौंफ धोकर रात भर पानी में भिगो दें।
  2. सुबह पानी छानकर बोतल में भर लें। दाने फेंक सकते हैं।

इस्तेमाल का तरीका

  • गर्म दोपहर में थोड़ा-थोड़ा करके पिएँ, एक बार में बड़ा गिलास नहीं।
  • बोतल छाया या फ़्रिज में रखें और उसी दिन खत्म करें।
  • इस पानी को उबालें नहीं। विचार भीगे हुए पानी का है, तेज़ काढ़े का नहीं।

मददगार आदतें

  • खुशबू साफ़ चाहिए तो भिगोने से पहले धनिए को हल्का कूट लें।
  • पानी बहुत महकता लगे तो अगली बार दाने कम रखें, गिलास बड़ा नहीं।

सावधानियाँ

  • हर रात ताज़ा भिगोएँ। एक दिन से ज़्यादा रखा पानी न पिएँ।
  • पेट पहले से ठंडा और ढीला लगे तो यह ठंडा पानी कम बैठ सकता है। ऐसे में गुनगुना जीरे का पानी बेहतर रह सकता है।
  • यह गर्मी का सहायक पानी है। दर्द, मल में खून या कमज़ोरी हो तो डॉक्टर का विकल्प नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पूरी बोतल एक साथ पी लें?

दोपहर भर धीरे-धीरे पिएँ। एक साथ बड़ा गिलास इस आदत का हिस्सा नहीं है।

क्या भीगे दाने भी खाएँ?

उन्हें छानकर अलग कर दें। यह उपाय पानी है, दानों का चम्मच नहीं।

क्या यह धनिए की चटनी जैसी है?

नहीं। चटनी हरे पत्तों से बनती है। यह धनिए के दानों और सौंफ का हल्का भीगा पानी है।
सभी देखें: पेट की समस्याओं के घरेलू उपाय