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एक-दो कलियां लहसुन घी में छौंककर रोज की दाल में मिलाना
एक-दो कलियां लहसुन जीरे के साथ घी में छौंककर रोज की दाल में मिलाना रसोई की आदत है। खाली पेट कच्चा लहसुन नहीं। यह सहायक है और डॉक्टर का विकल्प नहीं।

लहसुन तड़के में, खाली पेट नहीं
एक-दो कलियां लहसुन काटकर थोड़े घी और जीरे में गरम करने पर अकेले चबाए कच्चे लहसुन से नरम लगती हैं। गरम दाल में मिलकर यह दोपहर या रात के खाने का हिस्सा बनता है।
खाली पेट कच्चा लहसुन नहीं। दाल सहायक खाना है और डॉक्टर का विकल्प नहीं।
सामग्री
- एक या दो कलियां लहसुन
- एक छोटी चम्मच घी
- आधी छोटी चम्मच जीरा
- पकी हुई दाल की एक कटोरी
बनाने की विधि
- लहसुन छीलकर काटें। एक या दो कलियों पर ही रहें।
- घी गरम करें, जीरा और लहसुन डालें, और तब तक पकाएं जब तक लहसुन से मीठी खुशबू आए, जले नहीं।
इस्तेमाल का तरीका
- तड़का गरम दाल पर डालकर मिला दें।
- इसे चावल या रोटी के साथ सामान्य भोजन की तरह खाएं।
- इस तड़के की जगह खाली पेट कच्चा लहसुन न चबाएं।
मददगार आदतें
- लहसुन काला होने से पहले पैन आंच से उतार लें। जला लहसुन कड़वा लगता है।
- दाल की छोटी कटोरी में एक कली काफी है। पूरी गांठ दूसरा, तेज व्यंजन है।
सावधानियाँ
- खाली पेट कच्चा लहसुन नहीं।
- लहसुन से जलन होती हो तो छोड़ें या कम करें। सीमित करने को कहा गया हो तो डॉक्टर से पूछें।
- यह सिर्फ सहायक है और डॉक्टर का विकल्प नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुबह कच्चा लहसुन क्यों नहीं खाना?
- खाली पेट कच्चा लहसुन नहीं। यह उपाय एक-दो कलियां घी में छौंककर दाल में मिलाना है।
दाल में लहसुन कितना डालें?
- परिवार के बर्तन या एक कटोरे के लिए एक या दो कलियां। पूरी गांठ नहीं।
तबीयत कमजोर लगे तो क्या दाल डॉक्टर की जगह लेती है?
- नहीं। यह सहायक खाना है और डॉक्टर का विकल्प नहीं। तबीयत कुछ समय से खराब हो तो डॉक्टर को दिखाएं।




