घी, सरसों का तेल या रिफ़ाइंड? दिल की सेहत के लिए चिकनाई का समझदार इस्तेमाल
रसोई के बहुत कम सवाल ‘कौन-सा तेल सबसे अच्छा है?’ जितनी उलझन पैदा करते हैं। व्यावहारिक जवाब: अलग-अलग पारंपरिक तेल बदल-बदलकर, कुल मिलाकर कम मात्रा में इस्तेमाल करें, तलने का तेल दोबारा न इस्तेमाल करें, ट्रांस फ़ैट से बचें, और घी का आनंद संयम से लें।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद घी को पोषक और पाचन के अनुकूल चिकनाई के रूप में बहुत महत्व देता है — पर अपनी प्रकृति और गतिविधि के हिसाब से सही मात्रा में; ज़्यादा घी कफ और मेद बढ़ाता है। क्षेत्रीय भारतीय खाने में पारंपरिक रूप से सरसों, मूँगफली, तिल और नारियल तेल इस्तेमाल होते रहे हैं। आधुनिक पोषण विज्ञान अलग-अलग चिकनाई का मेल, संतृप्त वसा सीमित करना और ट्रांस फ़ैट (वनस्पति, बार-बार गरम किया तेल) से बचना सुझाता है।
सामग्री
- बदल-बदलकर इस्तेमाल के लिए दो-तीन तेल, जैसे सरसों, मूँगफली, तिल या राइस ब्रान तेल
- शुद्ध घी, कम मात्रा में
- नापने का चम्मच या पतली टोंटी वाला तेल का डिब्बा
बनाने की विधि
- घर के लिए महीने भर का तेल तय करें — आम तौर पर प्रति वयस्क महीने में लगभग 500 मि.ली. की सलाह दी जाती है — और नापकर इस्तेमाल करें।
इस्तेमाल का तरीका
- छौंक और भूनने के लिए बोतल से सीधे डालने के बजाय नापने वाले चम्मच से तेल लें।
- अगर डॉक्टर ने मना नहीं किया है तो रोज़ लगभग 1 छोटा चम्मच घी दाल, रोटी या खिचड़ी पर लें।
- तली चीज़ें कभी-कभार के लिए रखें; कई बार धुआँ उठने तक गरम हुआ तेल दोबारा कभी न इस्तेमाल करें।
मददगार आदतें
- ज़्यादातर दिनों तले स्नैक्स की जगह बेक किए, भुने और भाप में पके स्नैक्स लें।
- मेवे और बीज अच्छी चिकनाई लेने का स्वस्थ तरीका हैं।
सावधानियाँ
- दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज़ हो तो कुल चिकनाई और घी के बारे में डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह मानें; बताई गई दवाएँ जारी रखें।
- वनस्पति, ‘डालडा’ जैसे हाइड्रोजनेटेड फ़ैट और बार-बार के तेल में तले स्ट्रीट फ़ूड से बचें।
- तेल को उसके धुआँ उठने की सीमा से ज़्यादा गरम न करें।








