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रात में पैरों की नस चढ़ना: स्ट्रेच, गुनगुना तेल और खान-पान पर नज़र
पिंडली में अचानक, दर्दनाक गाँठ जो नींद से झटके से जगा दे — यह मांसपेशी की ऐंठन (नस चढ़ना) है। पिंडली को स्ट्रेच करना, गुनगुने तेल से मालिश, पानी की कमी न होने देना और केला, दही, हरी सब्ज़ियों जैसे खनिज वाले भोजन से यह कम हो सकती है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
उम्र बढ़ने, गर्भावस्था, पानी की कमी, लंबे समय खड़े रहने, अचानक व्यायाम और कुछ दवाओं से रात की ऐंठन आम है। आयुर्वेद ऐंठन (खल्ली) को मांसपेशियों को सिकोड़ने वाला वात बताता है — जो ठंड, रूखेपन, थकान और अनियमित भोजन से बढ़ता है — और गर्माहट, तेल व पोषण की सलाह देता है।
सामग्री
- 1 बड़ा चम्मच गुनगुना तिल का तेल
- पलंग के पास एक गिलास पानी
- दिन भर खनिज वाला भोजन: केला, नारियल पानी, दही, दूध, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मेवे और बीज
बनाने की विधि
- पलंग के पास तिल के तेल की छोटी शीशी और एक गिलास पानी रखें।
इस्तेमाल का तरीका
- ऐंठन के समय: पैर सीधा करें और पंजों को हल्के से अपनी ओर खींचें, या खड़े होकर एड़ी नीचे दबाएँ। मांसपेशी ढीली होने तक रुकें।
- फिर पिंडली पर गुनगुने तेल से ऊपर की ओर मालिश करें।
- रोज़ रात सोने से पहले हर तरफ़ 30 सेकंड पिंडलियों का स्ट्रेच करें, और हफ़्ते में कुछ बार पैरों की तेल मालिश करें।
मददगार आदतें
- दिन भर पर्याप्त पानी पिएँ, ख़ासकर गर्मियों में और व्यायाम के बाद।
- सर्दियों में पैर गरम रखें; पंजों को नीचे की ओर दबाती कसी चादर ढीली करें।
सावधानियाँ
- डॉक्टर से पूछे बिना कैल्शियम, मैग्नीशियम या पोटैशियम सप्लीमेंट शुरू न करें, ख़ासकर किडनी या दिल की बीमारी में।
- कुछ दवाएँ (जैसे पेशाब बढ़ाने वाली दवाएँ और स्टैटिन) ऐंठन ला सकती हैं — बार-बार ऐंठन हो तो डॉक्टर को बताएँ।
- पिंडली में सूजन, लाली या गर्माहट के साथ ऐंठन (संभावित थक्का), पैर में कमज़ोरी, या बार-बार और तेज़ ऐंठन हो तो इलाज लें।








