जोड़15 मिनट
ग़लत तकिये या स्क्रीन पर झुकने से अकड़ी गर्दन: गरम सिकाई और हल्के स्ट्रेच
सुबह उठे और सिर घुमा नहीं पा रहे, या लैपटॉप पर लंबे दिन के बाद कंधों के बीच गाँठ-सी लग रही है? गरम सिकाई, तेल की हल्की मालिश और गर्दन के धीमे स्ट्रेच से साधारण अकड़न आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाती है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
ज़्यादातर गर्दन की अकड़न मांसपेशियों के खिंचाव से होती है: टेढ़ा सोना, बहुत ऊँचा या बहुत चपटा तकिया, पंखे या एसी की ठंडी हवा, या स्क्रीन पर नीचे देखने से ‘टेक नेक’। आयुर्वेद गर्दन की अकड़न को मन्यास्तंभ कहता है और वात व ठंड से जोड़ता है; गर्माहट, तेल और ठंडी हवा से बचाव पारंपरिक उपाय हैं।
सामग्री
- तवे पर गरम किया तौलिया, या गरम पानी की थैली
- 1 बड़ा चम्मच गुनगुना तिल या सरसों का तेल
बनाने की विधि
- तौलिया गरम करें या थैली भरें; बाँह के अंदरूनी हिस्से पर जाँच लें।
- तेल हल्का गरम कर लें।
इस्तेमाल का तरीका
- दिन में दो-तीन बार गर्दन के पीछे और किनारों पर 10–15 मिनट गरम सिकाई करें।
- गर्दन और कंधों पर गुनगुने तेल से हल्की मालिश करें।
- धीरे-धीरे स्ट्रेच करें: कान को कंधे की ओर झुकाएँ, ठुड्डी को हर कंधे की ओर घुमाएँ, और ठुड्डी को छाती तक लाएँ — हर एक 15–20 सेकंड रोकें, दर्द में ज़बरदस्ती कभी न करें।
मददगार आदतें
- ऐसा तकिया लें जो गर्दन को रीढ़ की सीध में रखे; पेट के बल न सोएँ।
- स्क्रीन आँखों की ऊँचाई पर रखें और बीच-बीच में कंधे घुमाएँ।
- पंखे या एसी की सीधी हवा से गर्दन ढककर रखें।
सावधानियाँ
- सूजन वाली ताज़ा चोट पर गरम सिकाई न करें; गर्दन चटकाएँ या ज़ोर से न मरोड़ें।
- बुखार और सिरदर्द के साथ गर्दन में अकड़न, गिरने या दुर्घटना के बाद, बाँहों में सुन्नपन, झनझनाहट या कमज़ोरी, या सीने में दर्द या साँस फूलने के साथ हो तो तुरंत इलाज लें।
- दो हफ़्ते से ज़्यादा गर्दन दर्द रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।






