मुख्य सामग्री पर जाएँ
AllAyurvedics
जोड़20 मिनट

सुबह एड़ी का दर्द: गुनगुने नमक-पानी में पैर, बोतल से रोल और पिंडली का स्ट्रेच

अगर बिस्तर से उठते ही पहले क़दम ऐसे लगें जैसे पत्थर पर पैर रखा हो, तो अक्सर यह प्लांटर फ़ेशियाइटिस होता है — तलवे के नीचे की पट्टी में सूजन। गुनगुने पानी में पैर, बोतल पर तलवा घुमाना और रोज़ पिंडली का स्ट्रेच — आमतौर पर कुछ हफ़्तों में आराम मिल जाता है।

चित्र में सेंधा नमक, तिल की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

प्लांटर फ़ेशिया एक मोटी पट्टी है जो तलवे की मेहराब को सहारा देती है। घंटों खड़े रहना, सपाट या बिना सहारे वाले जूते, अचानक ज़्यादा चलना, कसी पिंडलियाँ और ज़्यादा वज़न — ये सब इस पर ज़ोर डालते हैं। आयुर्वेद इसे एड़ी में बैठा वात (वातकंटक, ‘वात का काँटा’) कहता है और गर्माहट, तेल व सख़्त-ठंडे फ़र्श से बचने की सलाह देता है। आधुनिक उपचार में स्ट्रेचिंग सबसे अहम है।

सामग्री

  • 2 बड़े चम्मच सेंधा नमक डाला टब भर गुनगुना पानी
  • जमाई हुई प्लास्टिक की पानी की बोतल (या बेलन)
  • मालिश के लिए थोड़ा गुनगुना तिल का तेल

बनाने की विधि

  1. टब में सुहाता गुनगुना पानी भरकर नमक घोलें।
  2. रोल करने के लिए रात भर पानी की बोतल जमा दें।

इस्तेमाल का तरीका

  • शाम को: 10–15 मिनट पैर पानी में रखें, सुखाएँ और तलवे व एड़ी पर गुनगुने तेल से मालिश करें।
  • सुबह, उठने से पहले: टखनों को 10 बार ऊपर-नीचे करें और पंजों को पीछे खींचकर तलवे को स्ट्रेच करें।
  • दिन में दो बार 5 मिनट जमी बोतल पर तलवा धीरे-धीरे घुमाएँ।
  • दीवार के सहारे पिंडली का स्ट्रेच, हर तरफ़ 30 सेकंड, दिन में तीन बार।

मददगार आदतें

  • घर में भी गद्देदार, मेहराब को सहारा देने वाले जूते या चप्पल पहनें; सख़्त फ़र्श पर नंगे पैर न चलें।
  • चलना धीरे-धीरे बढ़ाएँ और वज़न संतुलित रखें।

सावधानियाँ

  • डायबिटीज़ हो तो गरम पानी में पैर न रखें और रोज़ पैरों की जाँच करें।
  • चोट के बाद दर्द हो, एड़ी सूजी, लाल या गरम हो, सुन्नपन या झनझनाहट हो, या देखभाल के बावजूद 6–8 हफ़्ते से ज़्यादा दर्द रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।