पिप्पली (लंबी मिर्च): फ़ायदे और इस्तेमाल
पिप्पली तीखी आयुर्वेदिक मिर्च है जो खाँसी, जकड़न, पाचन और त्रिकटु में इस्तेमाल होती है। चुटकी भर इस्तेमाल के आसान तरीके और किसे नहीं लेनी चाहिए।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
पिप्पली का इस्तेमाल ऐसे क्यों
पिप्पली (लंबी मिर्च) पतली, बाली जैसी मिर्च है जो काली मिर्च से ज़्यादा तीखी होती है। सोंठ और काली मिर्च के साथ यह त्रिकटु बनाती है, आयुर्वेद का पुराना गर्म त्रिक।
पिप्पली आयुर्वेद के खाँसी और पाचन के योगों, जैसे सितोपलादि चूर्ण और त्रिकटु, में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली जड़ियों में से है। यह काली मिर्च से ज़्यादा गर्म है और चुटकी भर ही ली जाती है।
रसोई में भुनी पिप्पली के पाउडर की चुटकी सर्दियों के रसम में डाली जा सकती है या ज़ुकाम में कुछ दिन शहद के साथ चाटी जा सकती है।
सामग्री
- 2 से 3 पिप्पली
- 1 छोटा चम्मच शहद (बड़ों के लिए)
बनाने की विधि
- पिप्पली हल्की सूखी भूनकर पीस लें।
- एक छोटी चुटकी शहद में मिलाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- ज़ुकाम में दो-तीन दिन, दिन में एक बार धीरे-धीरे चाटें।
- या रसम या दाल के बर्तन में एक चुटकी डालें।
मददगार आदतें
- साबुत पिप्पली लें और थोड़ी-थोड़ी पीसें।
सावधानियाँ
- एक बार में कुछ दिनों से ज़्यादा न लें।
- बहुत गर्म है; एसिडिटी, अल्सर, गर्भावस्था और बच्चों में न लें।
- यह पारंपरिक इस्तेमाल है; वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पिप्पली और काली मिर्च एक हैं?
- नहीं, यह अलग पौधा है जिसका फल लंबा, बाली जैसा होता है।
क्या पिप्पली से वज़न घटता है?
- यह त्रिकटु का हिस्सा है, पर कोई मसाला चर्बी नहीं घटाता; आहार और व्यायाम ज़्यादा ज़रूरी हैं।
चुटकी भर पिप्पली कितनी होती है?
- पाउडर का चौथाई छोटे चम्मच से भी कम।




