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डिलीवरी के बाद का आहार: रिकवरी, ऊर्जा और स्तनपान के लिए भारतीय भोजन योजना

प्रसव के बाद के हफ़्ते भरने, ताक़त लौटाने और कई महिलाओं के लिए दूध बनाने का समय होते हैं। डिलीवरी के बाद का आहार गरम, ताज़ा बने, सुपाच्य भोजन पर केंद्रित हो — दाल, खिचड़ी, सब्ज़ियाँ, दूध और अंडे या पनीर — साथ में आयरन, कैल्शियम और भरपूर तरल, और पारंपरिक अजवाइन, जीरा, मेथी और थोड़ा घी।

चित्र में बर्फ़, मेथी, ताज़ा अदरक, जीरा की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

डिलीवरी के बाद का आहार: नई माँ के शरीर को क्या चाहिए

प्रसव के बाद शरीर ऊतकों की मरम्मत करता है, जन्म में गया ख़ून भरता है और — स्तनपान हो तो — रोज़ लगभग 500 अतिरिक्त कैलोरी चाहता है। प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी, आयोडीन और तरल ख़ास तौर पर ज़रूरी हैं। कब्ज़ आम है, इसलिए फ़ाइबर और पानी मायने रखते हैं।

आयुर्वेद में प्रसवोत्तर (सूतिका) काल वात बढ़ने का समय है। पारंपरिक देखभाल में गरम, स्निग्ध, हल्के मसाले वाला भोजन — अजवाइन पानी, जीरा, सौंफ, सोंठ, मेथी, गोंद और घी — पाचन मज़बूत होने के साथ धीरे-धीरे दिया जाता है। भारी लड्डू थोड़ी मात्रा में ही खाएँ, ख़ासकर अगर वज़न या शुगर की चिंता हो।

सामग्री

  • मूँग दाल खिचड़ी, दलिया, रोटी, चावल
  • सब्ज़ियाँ: लौकी, तोरी, कद्दू, पालक, मेथी, गाजर
  • प्रोटीन: दालें, दूध, दही, पनीर, अंडे, खाती हों तो मछली या चिकन
  • अजवाइन, जीरा, सौंफ, सोंठ, हर भोजन में एक छोटा चम्मच घी
  • स्नैक्स: फल, खजूर, भीगे बादाम, एक छोटा मेथी या गोंद लड्डू

बनाने की विधि

  1. ½ छोटा चम्मच अजवाइन 2 कप पानी में उबालें, डेढ़ कप रहने दें और सुहाए तो दिन भर गुनगुना घूँट-घूँट पिएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • सुबह जल्दी: गुनगुना पानी या अजवाइन पानी; भीगे बादाम।
  • नाश्ता: सब्ज़ियों के साथ दलिया या पोहा, एक गिलास दूध।
  • दोपहर: रोटी या चावल, दाल, एक सब्ज़ी, दही।
  • शाम: फल, छोटा लड्डू या भुना मखाना। रात: मूँग दाल खिचड़ी या सूप के साथ रोटी, जल्दी।

मददगार आदतें

  • हर 3–4 घंटे में खाएँ और दूध पिलाते समय पानी पास रखें।
  • डॉक्टर के दिए आयरन, कैल्शियम और विटामिन सप्लीमेंट जारी रखें।
  • परिवार और दोस्तों से भोजन की मदद स्वीकार करें।

सावधानियाँ

  • स्तनपान के दौरान क्रैश डाइटिंग न करें। कैफ़ीन सीमित करें और शराब से बचें।
  • गर्भावस्था में डायबिटीज़ हुई थी या हाई बीपी है तो पारंपरिक लड्डू और घी की मात्रा डॉक्टर या डाइटीशियन से तय करें और डॉक्टर का बताया इलाज जारी रखें।
  • हर्बल टॉनिक से पहले डॉक्टर से पूछें, क्योंकि कुछ दूध के ज़रिए शिशु पर असर कर सकते हैं या दवाओं से प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
  • ज़्यादा ब्लीडिंग, बुखार, बदबूदार स्राव, गंभीर मूड बदलाव, या खाना-पीना न हो पाए तो मदद लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डिलीवरी के बाद नई माँ को क्या खाना चाहिए?

दाल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, दूध या अंडे, फल और भरपूर तरल वाला गरम, घर का बना भोजन।

डिलीवरी के बाद किन चीज़ों से बचें?

तली, बहुत मसालेदार और पैकेट वाली चीज़ें, ज़्यादा कैफ़ीन और शराब सीमित करें। जो चीज़ आपको या शिशु को साफ़ तौर पर परेशान करे, उससे बचें।

क्या डिलीवरी के बाद घी अच्छा है?

भोजन में थोड़ा घी पारंपरिक और पौष्टिक है। ज़्यादा मात्रा से बहुत कैलोरी बढ़ती है, इसलिए संयम रखें।
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