नींद और तनाव10 मिनट
भारी रात के खाने के बाद सौंफ की हल्की चाय
जब रात का खाना भारी लगे, सोने से करीब एक घंटे पहले सौंफ की हल्की चाय पी जाती है। यह सौंफ का हल्का भिगोना है, गाढ़ा काढ़ा नहीं और नींद की दवा नहीं।

भारी रात के खाने के बाद सौंफ की चाय
यह कप उस शाम के लिए है जब भोजन भारी बैठे, उस रात के लिए नहीं जब पेट पहले से हल्का हो। एक छोटी चम्मच सौंफ गर्म पानी में कुछ मिनट भिगती है। सोने से एक घंटे पहले धीरे पीने का समय मिलता है, और जरूरत हो तो शौच जाने की जगह भी।
कप हल्का रखें। देर तक उबालकर पानी को गहरा और कड़वा करना सोने से पहले की चाय से ज्यादा है। यह अपच, सीने में जलन या अनिद्रा का इलाज नहीं करता। सौंफ पहले न भाई हो तो कप छोड़ दें।
सामग्री
- एक छोटी चम्मच सौंफ
- एक कप पानी
- दूसरा हल्का कप बनाना हो तो थोड़ी और सौंफ
बनाने की विधि
- पानी उबालें, आँच से उतारें, और सौंफ डालें।
- कुछ मिनट ढककर कप में छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- सोने से करीब एक घंटे पहले पिएँ, और उसी रात जब खाना भारी लगा हो।
- एक हल्का कप काफी है। कई कप से भोजन की जगह न भरें।
- घंटे का फासला रखें। लेटते समय पूरा कप न पिएँ।
मददगार आदतें
- खुशबू बढ़ानी हो तो दाने हल्के कुचलें। साबुत सौंफ से भी कप हल्का बनता है।
- दूसरा कप भी उतना ही हल्का हो, उन्हीं दानों का और गाढ़ा उबाल नहीं।
सावधानियाँ
- यह चाय अपच, अनिद्रा या किसी बीमारी का इलाज नहीं करती।
- सौंफ न भाए तो छोड़ दें।
- समय सोने से एक घंटे पहले है, ताकि लेटते ही पूरा कप न पीना पड़े।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सौंफ की चाय कब पिएँ?
- सोने से करीब एक घंटे पहले, उस रात जब खाना भारी लगा हो।
कप कितना कड़क हो?
- एक कप पानी में करीब एक छोटी चम्मच दानों का छोटा भिगोना। इसे गाढ़ा काढ़ा नहीं बनाना।
क्या इससे रात को भारी पेट ठीक हो जाता है?
- नहीं। यह हल्की रसोई चाय है। अपच या अनिद्रा का इलाज नहीं।





