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अमरूद के पत्तों का गरारा

कोमल अमरूद के पत्ते उबालकर ठंडे किए जाते हैं, चुटकी भर नमक मिलाया जाता है, और गरारा करके थूक दिया जाता है।

छोटे पैन में पानी और कोमल अमरूद के पत्ते, कटोरे में चुटकी नमक, और मेज पर खाली कप।

अमरूद के पत्तों का गरारा, जो थूका जाए

चार कोमल अमरूद के पत्ते पानी में उबालकर छाने जाते हैं और चुटकी भर नमक से गुनगुना गरारा बनता है। स्वाद कड़वा हो सकता है। इसीलिए उसे निगलना या उसमें शहद मिलाना ठीक नहीं। हर घूंट गरारा करके थूक दिया जाता है।

ऐसे पेड़ के पत्ते लें जिस पर दवा का छिड़काव न हुआ हो, यह आपको पता हो। जो बच्चे सुरक्षित गरारा न कर सकें वे न आजमाएं। यह गले के संक्रमण का इलाज नहीं। बुखार, चकत्ते, निगलने में तकलीफ, या कुछ दिनों से आगे की खांसी हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

सामग्री

  • 4 कोमल अमरूद के पत्ते
  • नमक की एक चुटकी
  • एक कप पानी

बनाने की विधि

  1. अमरूद के पत्ते धोकर पानी में पांच मिनट उबालें।
  2. छानें, नमक मिलाएं, और तरल को गुनगुना होने तक ठंडा करें।

इस्तेमाल का तरीका

  • एक घूंट गरारा करें और थूक दें। कुछ बार दोहराएं।
  • गरारा निगलें नहीं।
  • दिन में एक या दो बार काफी है। गला दुखे या खांसी कुछ दिनों से आगे रहे तो डॉक्टर से मिलें।

मददगार आदतें

  • जिन पत्तों पर छिड़काव न हुआ हो, वही कोमल पत्ते लें।
  • जो गरारा फेंकना है उसमें शहद न मिलाएं।

सावधानियाँ

  • केवल गरारा। हर घूंट थूक दें।
  • जो बच्चे सुरक्षित गरारा न कर सकें, उनके लिए नहीं।
  • यह गले के संक्रमण का इलाज नहीं। बुखार, चकत्ते या निगलने में तकलीफ हो तो डॉक्टर को दिखाएं। कुछ दिनों से आगे की खांसी भी डॉक्टर के पास जानी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अमरूद पत्ते का पानी पी लें?

नहीं। यह गरारा है। थूक दें।

कड़वा लगे तो क्या करें?

फिर भी थूक दें। फेंके जाने वाले गरारे को मीठा न करें।

क्या यह गले का संक्रमण ठीक कर देता है?

नहीं। दर्द बना रहे, बुखार हो, या खांसी कुछ दिनों से ज्यादा चले तो डॉक्टर से मिलें।
सभी देखें: सर्दी-खांसी के घरेलू उपाय