जड़ी-बूटियाँ और आहार20 मिनट
नागरमोथा (मुस्ता): फ़ायदे और इस्तेमाल
नागरमोथा खुशबूदार आयुर्वेदिक जड़ है जो पाचन, दस्त और ठंडे पानी के लिए इस्तेमाल होती है। घर पर आसान इस्तेमाल और कब डॉक्टर को दिखाएँ।

नागरमोथा के बारे में ज़रूरी बातें
नागरमोथा (मुस्ता) एक घास की खुशबूदार जड़ है। आयुर्वेद इसे पाचन, दस्त और ठंडक देने वाले पानी के लिए इस्तेमाल करता है।
मुस्ता पाचन के लिए आयुर्वेद की पसंदीदा जड़ है और षडंग पानीय का मुख्य हिस्सा है, जो मुस्ता, खस, चंदन, सोंठ और दूसरी जड़ियों के साथ उबाला गया पारंपरिक पानी है, बुखार और गर्मी में दिया जाता है।
इसका आसान रूप है कुटे मुस्ता का पानी में हल्का काढ़ा, जिसे ठंडा करके गर्मी में दिन भर घूँट-घूँट पिया जाए।
सामग्री
- 1 छोटा चम्मच कुटा नागरमोथा
- 1 लीटर पानी
बनाने की विधि
- कुटी जड़ को धीमी आँच पर पानी में 10 मिनट उबालें।
- ठंडा करके साफ़ बोतल में छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- एक-दो दिन दिन भर घूँट-घूँट पिएँ।
- रोज़ ताज़ा बनाएँ।
मददगार आदतें
- सूखी गाँठें साबुत लें; इनमें अच्छी लकड़ी जैसी खुशबू होती है।
सावधानियाँ
- बुखार, मल में खून या बच्चों में दस्त हों तो डॉक्टर को दिखाएँ।
- गर्भावस्था में न लें; दो दिन से ज़्यादा दस्त हों तो डॉक्टर को दिखाएँ।
- खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
षडंग पानीय क्या है?
- छह जड़ियों वाला शास्त्रीय पानी जो बुखार और गर्मी में दिया जाता है, मुस्ता और दूसरी ठंडी जड़ियों से बनता है।
क्या नागरमोथा की खुशबू अच्छी होती है?
- हाँ, इसकी लकड़ी जैसी, हल्की मसालेदार खुशबू होती है और इत्र में भी इस्तेमाल होता है।
क्या नागरमोथा और खस एक हैं?
- नहीं, दोनों अलग जड़ें हैं, हालाँकि दोनों ठंडक देती हैं।




