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नलंगु माऊ, मूँग-हल्दी का पारंपरिक स्नान चूर्ण
मूँग का आटा, हल्दी और सूखी गुलाब पंखुड़ियों से बना हल्का स्नान चूर्ण, दिवाली के तेल-स्नान से पहले साबुन की जगह। पैच टेस्ट करें; कटी त्वचा पर न लगाएँ।

रसोई से स्नान चूर्ण
नलंगु माऊ दक्षिण भारत का पारंपरिक स्नान चूर्ण है जो मूँग के आटे में थोड़ी हल्दी और सूखी गुलाब पंखुड़ियाँ मिलाकर बनता है। यह साबुन की जगह नरम क्लींज़र के रूप में, खासकर दिवाली के तेल-स्नान से पहले, इस्तेमाल होता है।
एक चम्मच चूर्ण पानी या दूध में घोलकर ढीला लेप बनाएँ और नम त्वचा पर हल्के से मलकर धो लें। घर पर थोड़ी मात्रा बनाएँ और सूखा रखें। यह पारंपरिक सफ़ाई की आदत है, त्वचा रोगों का इलाज नहीं।
सामग्री
- आधा कप मूँग का आटा
- 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
- 1 बड़ा चम्मच सूखी गुलाब पंखुड़ियों का पाउडर
बनाने की विधि
- तीनों मिलाकर सूखे जार में रखें।
- हर स्नान के लिए पानी या दूध से ढीला लेप बनाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- नम त्वचा पर हल्के से मलें और अच्छी तरह धोएँ।
- बाद में थोड़ा तेल या मॉइस्चराइज़र लगाएँ।
मददगार आदतें
- हल्दी पाउडर लें, कच्ची गाँठ नहीं, ताकि दाग कम पड़ें।
- हर महीने थोड़ी मात्रा बनाएँ।
सावधानियाँ
- पहले पैच टेस्ट करें; हल्दी हल्की त्वचा और कपड़ों पर दाग छोड़ सकती है।
- कटी या चिढ़ी त्वचा पर न लगाएँ।
- सफ़ाई की आदत है, इलाज नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रोज़ इस्तेमाल कर सकते हैं?
- कभी-कभार बेहतर है; रोज़ कुछ त्वचा को सुखा सकता है।
क्या यह साबुन की जगह लेता है?
- कई लोगों के लिए हाँ; ज़रूरत हो तो साबुन भी लगाएँ।
क्या बच्चों के लिए सुरक्षित है?
- हल्का है, पर पहले पैच टेस्ट करें।




