मानसून के बाद (शरद) की थाली: हल्की, कड़वी और मीठी
मौसम बदलते समय मूंग, चावल, लौकी, घी और एक कड़वी सब्ज़ी थोड़ी-थोड़ी, कम मिर्च और तेल के साथ। मौसमी खान-पान की मार्गदर्शिका, इलाज नहीं।

मौसम के बदलाव के हिसाब से खाना
आयुर्वेदिक मौसमी खान-पान में शरद मानसून के बाद का मौसम है जब मौसम नम से चमकीला और गरम होता है। ग्रंथ हल्के, ठंडक देने वाले, थोड़े कड़वे और मीठे भोजन सुझाते हैं, कम मिर्च, तेल और तले खाने के साथ। मूंग, चावल, लौकी, थोड़ा घी और करेला या मेथी जैसी कड़वी सब्ज़ी की थाली इस विचार से मेल खाती है। यह मौसमी खान-पान की मार्गदर्शिका है, डाइट या इलाज नहीं।
मात्रा छोटी रखें, खाना ताज़ा और सादा पकाएँ, और मिर्च, अचार और तले नाश्ते कम लें। पर्याप्त पानी पिएँ। डायबिटीज़, गुर्दे की बीमारी या कोई अन्य बीमारी हो तो भोजन का ढंग बदलने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से पूछें। कड़वी सब्ज़ियाँ ब्लड शुगर घटा सकती हैं, इसलिए डायबिटीज़ की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
सामग्री
- 1/2 कप पकी मूंग दाल या खिचड़ी
- 1/2 कप पका चावल और लौकी की सब्ज़ी
- 1 छोटी चम्मच घी और थोड़ा करेला या मेथी
बनाने की विधि
- मूंग और चावल एक साथ नरम खिचड़ी की तरह या अलग पकाएँ।
- लौकी हल्के मसालों से और कड़वी सब्ज़ी हल्की पकाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- छोटी मात्राएँ एक थाली में साथ परोसें।
- मिर्च, अचार और तले नाश्ते घटाएँ।
मददगार आदतें
- नियमित समय पर खाएँ।
- तेल एक छोटी चम्मच के आसपास रखें।
सावधानियाँ
- डायबिटीज़, गुर्दे की बीमारी या अन्य बीमारी में भोजन बदलने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से पूछें।
- कड़वी सब्ज़ियाँ ब्लड शुगर घटा सकती हैं; दवा लेते हों तो पूछें।
- मौसमी मार्गदर्शिका है, डाइट या इलाज नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह डाइट है?
- नहीं। यह हल्की मौसमी थाली है।
कड़वे भोजन क्यों?
- आयुर्वेद कड़वे स्वाद को इस मौसम से जोड़ता है।
क्या साल भर कर सकते हैं?
- यह मौसम के लिए है; दूसरे समय अलग थाली चाहिए।






