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नहाने से पहले सूखी ब्रशिंग (गर्षण)

नहाने से पहले मुलायम प्राकृतिक ब्रिसल वाले ब्रश से हृदय की ओर हल्के स्ट्रोक। चकत्ते, कटी या बहुत संवेदनशील त्वचा पर न करें।

फोटो में गोल लकड़ी का सूखा ब्रश, सुनहरे तेल की छोटी कटोरी और प्राकृतिक साबुन की टिकिया।

हल्के स्ट्रोक, रगड़ना नहीं

गर्षण आयुर्वेदिक अभ्यास है जिसमें नहाने से पहले सूखी त्वचा पर मुलायम ब्रश या कच्चे रेशम के दस्ताने से ब्रश किया जाता है। कई लोगों को गरम, झुनझुनी वाला अहसास और बाद में नरम त्वचा अच्छी लगती है, पर डिटॉक्स, सेल्युलाइट या लसिका निकासी के दावे प्रमाणित नहीं। यह त्वचा की आदत है, किसी बीमारी का इलाज नहीं।

सूखी त्वचा पर मुलायम प्राकृतिक ब्रिसल वाला ब्रश लें, हृदय की ओर हल्के, कोमल स्ट्रोक दो-तीन मिनट करें, फिर नहाएँ और मॉइश्चराइज़ करें। चेहरे पर ब्रश न करें, और चकत्ते, एक्ज़िमा, सोरायसिस, कटी, धूप से जली त्वचा, तिल या संक्रमण पर न करें। त्वचा लाल और दुखने लगे तो रुकें, और हफ़्ते में एक-दो बार ही करें।

सामग्री

  • मुलायम प्राकृतिक ब्रिसल का ब्रश या रेशम का दस्ताना
  • तौलिया
  • नहाने के बाद के लिए हल्का तेल या मॉइश्चराइज़र

बनाने की विधि

  1. मुलायम बालों वाला ब्रश चुनें।
  2. नहाने जाने से पहले सूखी त्वचा पर शुरू करें।

इस्तेमाल का तरीका

  • दो-तीन मिनट हृदय की ओर हल्के स्ट्रोक से ब्रश करें।
  • नहाएँ, थपथपाकर सुखाएँ और मॉइश्चराइज़ करें।

मददगार आदतें

  • हफ़्ते में एक-दो बार करें।
  • ब्रश अक्सर धोकर सुखाएँ।

सावधानियाँ

  • चकत्ते, एक्ज़िमा, सोरायसिस, कटी, धूप से जली, तिल या संक्रमित त्वचा पर न करें।
  • चेहरे पर न करें, और त्वचा दुखे तो रुकें।
  • त्वचा की आदत है, इलाज नहीं; डिटॉक्स और सेल्युलाइट के दावे प्रमाणित नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सूखी ब्रशिंग से शरीर डिटॉक्स होता है?

कोई प्रमाण नहीं। यह काम गुर्दे और यकृत करते हैं।

कितना दबाव दें?

हल्का; त्वचा दुखनी नहीं चाहिए।

कितनी बार?

हफ़्ते में एक-दो बार।