डायबिटीज़ में सहायक25 मिनट
कभी-कभार की अदला-बदली में राजगिरा (रामदाना) की रोटी
राजगिरा के आटे में थोड़ा गेहूँ या आलू मिलाकर नरम रोटी, कभी-कभी सामान्य रोटी की जगह। अदला-बदली है, इलाज नहीं।

कभी-कभार एक अलग अनाज
राजगिरा, यानी रामदाना, एक छोटा बीज है जिसका आटा व्रत के दिनों में खूब खाया जाता है और ग्लूटन रहित विकल्प के रूप में बिकता है। इसमें कई अनाजों से ज़्यादा प्रोटीन और सौंधा स्वाद है। यह अनाज में विविधता का तरीका है, ब्लड शुगर या वज़न का इलाज नहीं।
राजगिरा आटे में ग्लूटन नहीं होता, इसलिए रोटी नाज़ुक होती है। इसे थोड़े गेहूँ के आटे या उबले आलू के साथ मिलाएँ और दो शीट के बीच बेलें। ताज़ी खाएँ। गुर्दे की समस्या हो या तय आहार पर हों तो मात्रा डॉक्टर से पूछें।
सामग्री
- 1 कप राजगिरा आटा
- 2 बड़ी चम्मच गेहूँ का आटा या आधा उबला आलू
- गुनगुना पानी और नमक
बनाने की विधि
- राजगिरा आटे में गेहूँ का आटा या मसला आलू, नमक और गुनगुना पानी मिलाकर नरम आटा गूँधें।
- दो कागज़ या प्लास्टिक शीट के बीच बेलें और गरम तवे पर सेंकें।
इस्तेमाल का तरीका
- सब्ज़ी और दही के साथ एक रोटी खाएँ।
- रोज़ नहीं, कभी-कभार खाएँ।
मददगार आदतें
- शीट के बीच बेलें ताकि चिपके नहीं।
- गरम खाएँ क्योंकि जल्दी सूखती है।
सावधानियाँ
- गुर्दे की समस्या या तय आहार हो तो मात्रा डॉक्टर से पूछें।
- अदला-बदली है, ब्लड शुगर या वज़न का इलाज नहीं।
- ताज़ी बनाकर खाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या राजगिरा ग्लूटन रहित है?
- बीज स्वाभाविक रूप से ग्लूटन रहित है, पर क्रॉस-कंटैमिनेशन के लिए पैकेट देखें।
क्या सिर्फ़ राजगिरा आटे से बना सकते हैं?
- अकेले बेलना कठिन है। थोड़ा गेहूँ या आलू मदद करता है।
क्या राजगिरा डायबिटीज़ के लिए अच्छा है?
- यह योजना में फिट हो सकने वाली अदला-बदली है, पर इलाज नहीं।




