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माहवारी के दिनों में तिल वाला दूध
भुने तिल गुनगुने दूध में मिलाकर, चाहें तो थोड़ा गुड़ डालकर, कुछ लोग माहवारी के दिन पीते हैं। यह खाना है, मासिक चक्र की दवा नहीं।

माहवारी के दिन गुनगुना तिल दूध
तिल चिकने और पेट भरने वाले होते हैं, इसलिए एक चम्मच तिल गुनगुने दूध में नाश्ते जैसा है, शीशी वाली दवा नहीं। माहवारी के दिन जब थकान हो और शाम का खाना हल्का रहा हो, तब यह पिया जाता है।
तिल को हल्की आँच पर भूनें जब तक खुशबू आए, मोटा कूटें, और दूध में मिलाएँ। दूध खौलता हुआ नहीं, गुनगुना होना चाहिए। गुड़ कम रखें। यह हार्मोन नहीं संभालता और डॉक्टर के दिए लोहे की गोली की जगह नहीं लेता।
सामग्री
- 1 बड़ा चम्मच तिल
- 1 छोटा कप दूध
- 1 छोटा चम्मच गुड़, या बिना मिठास चाहें तो और कम
बनाने की विधि
- तिल को हल्की आँच पर सुखा भूनें, फिर मोटा कूट लें।
- दूध गुनगुना करें, तिल और गुड़ मिलाएँ, और उफनने से पहले उतार लें।
इस्तेमाल का तरीका
- माहवारी के दिन एक छोटा कप पिएँ, अक्सर शाम को।
- इसे हल्के भोजन के साथ खाने की तरह लें, भरे पेट पर बड़ी मिठाई की तरह नहीं।
- पहले से भारीपन लगे तो दूसरा कप न लें।
मददगार आदतें
- सफेद या काले तिल दोनों चलेंगे। जलाएँ नहीं, हल्का भूनें।
- दूध न पचे तो ज़बरदस्ती बड़ा गिलास न पिएँ।
सावधानियाँ
- तिल से एलर्जी हो तो इसे न लें।
- ज़्यादा गुड़ केवल मिठास है, कोई तेज़ उपाय नहीं।
- बहुत अधिक रक्तस्राव, चक्कर या ऐसा दर्द जो काम रुकवा दे, डॉक्टर का विषय है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या तिल वाला दूध माहवारी की दवा है?
- नहीं। यह माहवारी के दिनों का गुनगुना खाना है, चक्र की दवा नहीं।
क्या यह अधिक रक्तस्राव रोकता है?
- नहीं। यह बहाव को नियंत्रित नहीं करता। अधिक रक्तस्राव या चक्कर पर डॉक्टर से बात करें।
तिल वाला दूध कितनी बार लें?
- माहवारी के दिनों में एक छोटा कप काफी है। पूरे महीने कई कप ज़रूरी नहीं।





