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रात के खाने के बाद चबाने के लिए भुनी सौंफ
मीठी खुशबू तक सूखा भुनी सौंफ का एक छोटा चम्मच वह खाने के बाद का चबाना है जो कई भारतीय थालियों पर पहले से आता है। भूनने से महक जागती है। मात्रा एक चम्मच ही रहती है।

खाने के बाद सौंफ
सौंफ वह मुँह-ताज़ा बीज है जो खाने के अंत में परोसा जाता है। एक मिनट सूखा भूनने से कच्ची धार कम होती है और हल्की भुनी महक आती है। धीरे चबाना ही पूरा काम है। उबालने, मीठा करने या बड़ी खुराक कूटने की ज़रूरत नहीं।
भारी रात का खाना कफ जैसा भरापन और सुस्त अग्नि छोड़ सकता है। भुनी सौंफ का चम्मच उस अभी-खाए भारीपन और मसाले के स्वाद को शांत कर सकता है। रात को दर्द, जलन या उल्टी हो तो डॉक्टर का विकल्प नहीं।
सामग्री
- एक छोटा चम्मच सौंफ
- सौंफ भूनने के लिए सूखा तवा
- खाने के बाद चबाने के लिए छोटा चम्मच
बनाने की विधि
- सूखा तवा गर्म करें और सौंफ को चलाते हुए तब तक भूनें जब तक मीठी खुशबू आए और रंग एक छाया गहरा हो।
- थाली में निकालें और चबाने लायक ठंडी होने दें।
इस्तेमाल का तरीका
- रात के खाने के बाद एक छोटा चम्मच धीरे चबाएँ।
- एक चम्मच मात्रा है। बीजों की कटोरी न खाएँ।
- खाना पहले ही बहुत देर से हुआ हो और तुरंत लेटना हो तो यह छोड़ दें। थोड़ी देर बैठे रहें।
मददगार आदतें
- धीमी आँच काफ़ी है। पैन धुएँ तो सौंफ जलकर कड़वी हो जाती है।
- सूखी रहे तो थोड़ी भुनी सौंफ साफ़ डिब्बे में दो-तीन दिन रख सकते हैं।
सावधानियाँ
- खाने के बाद एक चम्मच, रात भर कई चम्मच नहीं।
- सौंफ से आपको सीने में जलन लौटती हो तो चबाना छोड़ दें।
- सिर्फ़ सहायक आदत है, डॉक्टर का विकल्प नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कच्ची सौंफ चल जाएगी?
- कच्चे दाने आम हैं, पर यह उपाय सूखा भुना एक चम्मच है, खाने के बाद चबाया हुआ।
क्या चीनी या मिश्री मिलाएँ?
- ज़रूरत नहीं। भुनी सौंफ अपने आप काफ़ी मीठी लगती है।
क्या सौंफ की चाय वही है?
- चाय अलग घूँट है। यहाँ सूखा भुनी सौंफ का एक चम्मच चबाया जाता है।



