मुख्य सामग्री पर जाएँ
AllAyurvedics

बीमारी के बाद घी वाला अश्वगंधा दूध

दूध में थोड़ी अश्वगंधा और घी की बूँद, बीमारी के बाद ताक़त लौटाने का पारंपरिक पेय, सिर्फ़ डॉक्टर की सहमति से।

चित्र में अश्वगंधा की जड़, इलायची की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

घर पर अश्वगंधा का समझदारी से इस्तेमाल

अश्वगंधा एक जड़ है जिसे आयुर्वेद रसायन, यानी ताक़त और शांति के लिए ली जाने वाली जड़ी-बूटियों में गिनता है। कुछ छोटे अध्ययनों में तनाव और नींद में मदद के संकेत मिले हैं, पर यह असली असर और साइड इफ़ेक्ट वाली जड़ी-बूटी है, रोज़ का विटामिन नहीं।

आयुर्वेद बुखार या बीमारी के बाद, जब भूख और ताक़त कम होती है, स्वास्थ्य-लाभ के दौरान अश्वगंधा को रसायन की तरह इस्तेमाल करता है। खाना, आराम और धीरे-धीरे गतिविधि पहले आते हैं। जड़ी जोड़ने से पहले डॉक्टर से पूछें, ख़ासकर अगर कोई दवा ले रहे हों।

सामग्री

  • ¼ से ½ छोटा चम्मच अश्वगंधा जड़ का पाउडर
  • 1 कप दूध
  • ½ छोटा चम्मच घी
  • चुटकी भर इलायची

बनाने की विधि

  1. अश्वगंधा को दूध में तीन-चार मिनट उबालें।
  2. घी और इलायची मिलाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • स्वास्थ्य-लाभ के दौरान दो-तीन हफ़्ते शाम को गुनगुना पिएँ।
  • सामान्य महसूस होने पर बंद करें।

मददगार आदतें

  • ऐसे ब्रांड का जड़ का चूर्ण लें जिस पर पौधे का हिस्सा और बैच नंबर लिखा हो।

सावधानियाँ

  • सक्रिय बुखार या इन्फ़ेक्शन के दौरान न लें।
  • गर्भावस्था और स्तनपान में न लें।
  • थायरॉइड, ऑटोइम्यून बीमारी, लिवर की समस्या हो या नींद, BP या शुगर की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
  • अगर आप नियमित दवा लेते हैं या कोई पुरानी बीमारी है, तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दूध और घी के साथ क्यों?

आयुर्वेद चिकनाई को वाहक मानता है जिससे जड़ी सौम्य और ज़्यादा पोषक बनती है।

क्या मीठा कर सकते हैं?

थोड़ा गुड़ या मिश्री पारंपरिक है; डायबिटीज़ हो तो न डालें।

अश्वगंधा कितने समय तक ले सकते हैं?

आमतौर पर कुछ हफ़्तों का छोटा कोर्स होता है; लंबे समय तक लेने से पहले डॉक्टर से बात करें।