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बबूल: दाँतों और मसूड़ों के लिए फ़ायदे और इस्तेमाल
बबूल की टहनी, छाल और गोंद लंबे समय से भारत में दाँतों और मसूड़ों के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं। घर पर बबूल के आसान इस्तेमाल और ध्यान रखने की बातें।

भारतीय घरों में बबूल
बबूल की टहनियाँ पारंपरिक दातून हैं, और इसकी कसैली छाल और गोंद आयुर्वेदिक मंजन और मसूड़ों के कुल्ले में आते हैं।
बबूल का पेड़ भारत के सूखे इलाकों में उगता है। इसकी टहनियाँ दातून की तरह चबाई जाती हैं, कसैली छाल मसूड़ों के कुल्ले के लिए उबाली जाती है, और इसका गोंद सर्दियों के लड्डुओं में डाला जाता है।
घर पर मुँह की देखभाल के लिए सबसे आसान तरीका है ब्रश के बाद छाल के ठंडे काढ़े से कुल्ला। इससे मसूड़े कसे हुए महसूस होते हैं, पर मसूड़ों से खून आए तो डेंटिस्ट ज़रूरी है।
सामग्री
- 1 बड़ा चम्मच बबूल की छाल के टुकड़े
- 2 कप पानी
बनाने की विधि
- छाल को पानी में आधा रहने तक उबालें।
- ठंडा करके छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- ब्रश के बाद कुछ घूँट मुँह में घुमाकर थूक दें।
- एक हफ़्ते तक, दिन में एक बार इस्तेमाल करें।
मददगार आदतें
- ब्रश करने से पहले टहनी का सिरा चबाकर नरम रेशे बना लें।
सावधानियाँ
- काढ़ा ज़्यादा मात्रा में न निगलें।
- नरम, ताज़ी टहनी लें; सख़्त टहनी मसूड़ों को चोट पहुँचा सकती है।
- यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बबूल का गोंद और गोंद कतीरा एक हैं?
- नहीं, बबूल का गोंद अकेशिया गोंद है; गोंद कतीरा अलग पौधे से आता है।
क्या बबूल से दाँत सफ़ेद होते हैं?
- नहीं; यह कसैला है, दाँत सफ़ेद करने वाला नहीं।
क्या दातून ब्रश की जगह ले सकती है?
- कभी-कभार अतिरिक्त रूप से; ब्रश और पेस्ट बेहतर सफ़ाई करते हैं।




