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लौंग इलायची का शाम का घूंट

एक लौंग और एक इलायची पानी में उबालकर शाम का छोटा घूंट बनता है। खुशबू हल्की रहती है। यह बड़ा तीखा काढ़ा नहीं और रोग-प्रतिरोध का वादा नहीं।

शाम की रसोई मेज पर एक लौंग, एक हरी इलायची और स्टील के छोटे कप में साफ मसाले वाला पानी।

शाम को लौंग और इलायची का घूंट

लौंग और इलायची मसाला दान में आम खुशबू हैं। एक-एक दाना एक कप पानी में उबालने से शांत शाम का घूंट बन जाता है। मकसद गर्म खुशबू है, मुँह सुन्न कर देने वाला गाढ़ा काढ़ा नहीं।

कप छोटा रखें। ज्यादा लौंग मुँह और पेट पर तीखी लग सकती है। यह घूंट सामान्य रात के खाने के साथ की चीज़ है। बीमार हों तो भोजन, नींद या देखभाल की जगह नहीं लेता।

सामग्री

  • 1 लौंग
  • 1 हरी इलायची
  • 1 कप पीने का पानी

बनाने की विधि

  1. लौंग और इलायची पानी में डालें।
  2. कुछ मिनट उबालें, छानें, और छोटा गुनगुना घूंट रखें।

इस्तेमाल का तरीका

  • शाम को एक छोटा कप पिएँ।
  • कप तेज़ करने के लिए और लौंग न डालें।
  • खाली पेट मसाला न सुहाए तो खाने के बाद लें।

मददगार आदतें

  • खुशबू साफ चाहिए तो इलायची हल्की कूट लें।
  • घूंट तीखा लगे तो थोड़ा गुनगुना पानी और मिला लें।

सावधानियाँ

  • एक लौंग और एक इलायची काफी हैं। मुट्ठी भर बहुत है।
  • मुँह या पेट में जलन हो तो बंद कर दें।
  • यह शाम का घूंट बेहतर रोग-प्रतिरोध का वादा नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घूंट में लौंग और इलायची कितनी है?

पानी के एक छोटे कप में एक लौंग और एक इलायची।

क्या पूरे परिवार के लिए बड़ा पतीला शाम भर चलाएँ?

हर कप छोटा रखें। बड़ा तीखा काढ़ा इसका मतलब नहीं।

क्या यह रात का घूंट रोग-प्रतिरोध बढ़ाता है?

नहीं। यह गर्म खुशबू वाला कप है। ऐसा वादा नहीं।
सभी देखें: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के घरेलू उपाय