त्वचा20 मिनट
फटी एड़ियों के लिए गुनगुना पानी और घर का घी–मोम बाम
सूखी हवा, नंगे पैर और खुली चप्पलों की वजह से फटी एड़ियाँ (बिवाई) भारत में सर्दी-गर्मी दोनों की परेशानी हैं। गुनगुने पानी में पैर डुबोना, हल्का घिसना और रात भर मोज़ों के नीचे गाढ़ा घरेलू बाम — इससे सच में फ़र्क़ पड़ता है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद में एड़ियों का फटना (पाददारी) बढ़े हुए वात का संकेत है — रूखापन वहाँ जमता है जहाँ त्वचा सबसे मोटी है और सबसे ज़्यादा दबाव झेलती है। शास्त्रीय उपाय है पैरों में तेल लगाना: पादाभ्यंग। घी या नारियल तेल में थोड़ा मोम मिलाकर बना बाम अकेले तेल से ज़्यादा देर त्वचा पर टिकता है और दरारें भरने तक नमी को बाँधे रखता है।
सामग्री
- 1 बड़ा चम्मच मधुमक्खी का मोम (या बिना रंग-ख़ुशबू वाली सादी मोमबत्ती का छोटा टुकड़ा)
- 3 बड़े चम्मच घी या नारियल तेल
- चुटकी भर हल्दी (वैकल्पिक)
- एक चम्मच नमक डाला टब भर गुनगुना पानी; झाँवा पत्थर
बनाने की विधि
- मोम और घी/तेल को स्टील की छोटी कटोरी में गरम पानी के ऊपर रखकर पिघलाएँ। हल्दी मिलाएँ, साफ़ डिब्बी में डालें और जमने दें।
- टब में सुहाता गुनगुना पानी भरकर नमक घोल लें।
इस्तेमाल का तरीका
- रात को 10–15 मिनट पैर पानी में रखें, फिर एड़ियों को झाँवे से हल्के से घिसें — ज़ोर से न खुरचें।
- अच्छी तरह सुखाकर एड़ियों और दरारों पर बाम की मोटी परत लगाएँ।
- रात भर सूती मोज़े पहनें। एक हफ़्ते रोज़ करें, फिर हफ़्ते में दो-तीन बार।
मददगार आदतें
- जहाँ तक हो सके बंद या गद्देदार जूते-चप्पल पहनें, और ठंडे फ़र्श पर देर तक नंगे पैर न खड़े रहें।
- पर्याप्त पानी पिएँ और खाने में घी और तिल जैसी अच्छी चिकनाई शामिल करें।
सावधानियाँ
- डायबिटीज़ हो तो बिना सलाह पैर न भिगोएँ, न घिसें; रोज़ पैरों की जाँच करें और किसी भी दरार, कट या संक्रमण पर डॉक्टर को दिखाएँ।
- ख़ून निकलती, बहुत गहरी या संक्रमित (मवाद, सूजन, लाली) एड़ियों पर झाँवा या बाम न लगाएँ — डॉक्टर को दिखाएँ।
- पिघले मोम का तापमान जाँच लें; लगाने से पहले पूरी तरह ठंडा होने दें।





