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ईसबगोल की भूसी: रोज़ के रेशे की आसान आदत
ईसबगोल भारतीय घर की दवा वाली अलमारी की सबसे काम की चीज़ों में से है — एक नरम, प्राकृतिक रेशा जो सख़्त मल को आसान बनाता है और पतले मल को भी बाँध सकता है। बस शर्त है कि इसे भरपूर पानी के साथ लिया जाए।

आयुर्वेद की दृष्टि से
ईसबगोल प्लांटेगो ओवाटा के बीज की भूसी है, जो गुजरात और राजस्थान में ख़ूब उगाई जाती है। पानी में मिलते ही यह फूलकर चिकना जेल बन जाती है। आँतों में यह जेल मात्रा और नमी बढ़ाता है — इसीलिए यह कब्ज़ में भी मदद करता है और दही के साथ हल्के दस्त में भी। आयुर्वेद इसे ठंडा और शांत करने वाला मानता है — तेज़ जुलाब से कहीं सौम्य, और रेशे की कमी वाले आहार में नियमित रूप से लेने लायक।
सामग्री
- 1–2 छोटे चम्मच ईसबगोल की भूसी
- कब्ज़ के लिए 1 गिलास (250 मि.ली.) पानी या गुनगुना दूध
- या पतले दस्त के लिए आधा कप ताज़ा दही
बनाने की विधि
- ईसबगोल को पानी या दूध में घोलें और गाढ़ा होने से पहले तुरंत पी लें।
- दस्त के लिए इसे दही में मिलाकर तुरंत खा लें।
इस्तेमाल का तरीका
- कब्ज़ में: रात को सोते समय लें और ऊपर से एक गिलास पानी और पिएँ।
- हल्के दस्त में: 1 छोटा चम्मच दही में, दिन में एक-दो बार, ओआरएस के साथ।
- गैस से बचने के लिए 1 छोटे चम्मच से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
मददगार आदतें
- ईसबगोल तभी सबसे अच्छा काम करता है जब आहार में फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज भी हों।
- ईसबगोल और दूसरी दवाओं में 2 घंटे का अंतर रखें, क्योंकि यह उनका असर धीमा कर सकता है।
सावधानियाँ
- हमेशा भरपूर पानी के साथ लें — सूखा या कम पानी में लेने से गले में अटकने या आँत रुकने का ख़तरा है।
- निगलने में दिक़्क़त, आँत में सिकुड़न या रुकावट हो तो न लें।
- डायबिटीज़ हो तो डॉक्टर से पूछें, क्योंकि यह शुगर और दवा के समय पर असर डाल सकता है; बिना चीनी वाला ईसबगोल चुनें।
- बच्चों के लिए, गर्भावस्था में, या दो हफ़्ते से ज़्यादा चलने वाली कब्ज़ में डॉक्टर से सलाह लें।







