रोग प्रतिरोधक क्षमता10 मिनट
बरसाती ज़ुकाम की शुरुआत में कालमेघ और तुलसी की चाय
कुछ कालमेघ और तुलसी पत्तियों की हल्की चाय, ज़ुकाम के पहले लक्षणों पर दो-तीन दिन। कड़वी, थोड़े समय के लिए और सिर्फ़ बड़ों के लिए।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
आयुर्वेद में कालमेघ
कालमेघ, 'कड़वाहट का राजा', आयुर्वेद की सबसे कड़वी जड़ियों में से एक है। कुछ अध्ययनों में सर्दी-ज़ुकाम के लक्षण जल्दी कम होने के संकेत हैं; यह तेज़ है और रोज़ इस्तेमाल के लिए नहीं।
कुछ अध्ययनों में शुरुआत में लेने पर कालमेघ से ज़ुकाम जल्दी ठीक होने के संकेत हैं। तुलसी कड़वाहट नरम करती है। बरसात में बुखार डेंगू या मलेरिया भी हो सकता है, इसलिए तेज़ बुखार या दो दिन से ज़्यादा बुखार रहे तो जाँच करवाएँ।
सामग्री
- 2 से 3 सूखी कालमेघ पत्तियाँ
- 6 तुलसी पत्ते
- 1½ कप पानी
- स्वाद अनुसार शहद (बड़ों के लिए)
बनाने की विधि
- कालमेघ और तुलसी पानी में पाँच मिनट उबालें; छान लें।
- गुनगुना होने पर शहद मिलाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- दो-तीन दिन, दिन में दो बार आधा कप पिएँ।
मददगार आदतें
- मात्रा बहुत कम रखें; कड़वाहट ख़ुद एक सीमा है।
सावधानियाँ
- गर्भावस्था में और BP या खून पतला करने की दवा के साथ न लें।
- गर्भावस्था, गर्भधारण की कोशिश और BP या खून पतला करने की दवा के साथ न लें।
- सिर्फ़ कुछ दिनों के लिए लें।
- अगर आप नियमित दवा लेते हैं या कोई पुरानी बीमारी है, तो पहले डॉक्टर से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इससे डेंगू ठीक होता है?
- नहीं। डेंगू में डॉक्टरी निगरानी ज़रूरी है; जाँच में देर न करें।
क्या अदरक डाल सकते हैं?
- हाँ, अदरक का एक टुकड़ा ठीक है।
क्या कालमेघ से बुखार ठीक होता है?
- बुखार की सही जाँच ज़रूरी है, ख़ासकर डेंगू और मलेरिया के मौसम में।



