नींद और तनाव10 मिनट
बेचैन मन के लिए मंडूकपर्णी (गोटू कोला) की चाय
कुछ ताज़े या सूखे गोटू कोला पत्तों की हल्की हरी चाय, दोपहर या शाम को, शांत ध्यान के लिए दक्षिण भारत की जड़ी।

आयुर्वेद में मंडूकपर्णी
मंडूकपर्णी (गोटू कोला) गोल पत्तों वाली फैलने वाली जड़ी है जिसे केरल और श्रीलंका में साग की तरह खाया जाता है और आयुर्वेद में मन और त्वचा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
गोटू कोला तमिलनाडु और केरल में साग (वल्लारै कीरै) की तरह खाया जाता है और आयुर्वेद में मेध्य जड़ी के रूप में इस्तेमाल होता है। छोटे अध्ययनों में शांत करने वाले असर के संकेत हैं; कम मात्रा में यह सौम्य और खाने जैसा है।
सामग्री
- 6 से 8 ताज़े गोटू कोला पत्ते या 1 छोटा चम्मच सूखे
- 1 कप गर्म पानी
बनाने की विधि
- पत्ते गर्म पानी में पाँच मिनट भिगोएँ; छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- हफ़्ते में कुछ बार दोपहर या शुरुआती शाम को पिएँ।
मददगार आदतें
- दक्षिण भारत के बाज़ारों में ताज़े पत्ते 'वल्लारै' या 'ब्राह्मी' नाम से बिकते हैं; देख लें कौन सा पौधा है।
सावधानियाँ
- लिवर की बीमारी, गर्भावस्था या नींद की दवाओं के साथ न लें।
- लिवर की बीमारी और गर्भावस्था में न लें; नींद की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
- यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इसकी चटनी बना सकते हैं?
- हाँ, वल्लारै चटनी इसे खाने का पारंपरिक तरीका है।
क्या यह कड़वी लगती है?
- हल्की कड़वी और घास जैसी; थोड़ा शहद मदद करता है।
क्या गोटू कोला और ब्राह्मी एक हैं?
- नहीं, हालाँकि कुछ इलाकों में दोनों को ब्राह्मी कहा जाता है।






