बच्चों की खाँसी में मुलेठी: सावधानी से
मुलेठी बच्चों की खाँसी का लोकप्रिय घरेलू उपाय है। मात्रा क्यों मायने रखती है, किन बच्चों को नहीं देनी चाहिए, और सुरक्षित विकल्प।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
मुलेठी के बारे में ज़रूरी बातें
मुलेठी (यष्टिमधु) स्वाद में मीठी और गले को आराम देने वाली होती है, इसीलिए गले के नुस्खों में आती है। इसमें ग्लाइसिराइज़िन होता है, जो ज़्यादा या लंबे इस्तेमाल पर BP बढ़ा सकता है और पोटैशियम घटा सकता है।
मुलेठी गले को आराम देती है और आयुर्वेदिक खाँसी सिरप का आम घटक है। इसमें ग्लिसराइज़िन होता है, जो ज़्यादा मात्रा या लंबे इस्तेमाल में BP बढ़ा सकता है और पोटैशियम घटा सकता है। बच्चे मात्रा के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए इसे कम समय और सलाह के अनुसार ही दें।
सामग्री
- मुलेठी सिर्फ़ बच्चों के डॉक्टर या वैद्य की सलाह पर (बड़े बच्चों के लिए बहुत थोड़ी चुटकी या चूसने के लिए डंडी)
बनाने की विधि
- बच्चे को मुलेठी देने से पहले बच्चों के डॉक्टर से पूछें।
- एक साल से बड़े बच्चों के लिए शहद और गर्म पेय आसान पहले विकल्प हैं।
इस्तेमाल का तरीका
- सलाह मिले तो दो-तीन दिन से ज़्यादा न दें।
- बड़ों के खाँसी के योग बच्चों को कभी न दें।
मददगार आदतें
- सूखी पीली डंडियाँ खरीदें; बंद डिब्बे में महीनों चलती हैं।
सावधानियाँ
- किडनी या दिल की समस्या वाले बच्चों को न दें। साँस में तकलीफ़, घरघराहट, तेज़ बुख़ार या हफ़्ते से ज़्यादा खाँसी में डॉक्टर को दिखाएँ।
- हाई BP, दिल या किडनी की बीमारी और गर्भावस्था में न लें।
- कुछ दिनों तक ही, थोड़े समय के लिए इस्तेमाल करें।
- शिशुओं और पाँच साल से छोटे बच्चों के लिए पहले बच्चों के डॉक्टर से पूछें।
- खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बच्चा मुलेठी की डंडी चूस सकता है?
- बड़े बच्चे थोड़ी देर, निगरानी में; छोटे बच्चों के गले में अटक सकती है।
क्या आयुर्वेदिक खाँसी सिरप बच्चों के लिए सुरक्षित हैं?
- सिर्फ़ बच्चों के लिए लिखे सिरप, लिखी मात्रा में दें।
क्या मुलेठी और लिकोरिस कैंडी एक हैं?
- नहीं, कैंडी में ज़्यादातर चीनी और स्वाद होता है; मुलेठी सूखी जड़ है।



