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खराश वाले गले के लिए मुलेठी-तुलसी की चाय

मुलेठी की जड़ का छोटा टुकड़ा और कुछ तुलसी पत्ते उबालकर बनी प्राकृतिक रूप से मीठी चाय, गले की खराश और दर्द के लिए। सिर्फ़ दो-तीन दिन।

चित्र में मुलेठी, तुलसी की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

आयुर्वेद में मुलेठी

मुलेठी (यष्टिमधु) स्वाद में मीठी और गले को आराम देने वाली होती है, इसीलिए गले के नुस्खों में आती है। इसमें ग्लाइसिराइज़िन होता है, जो ज़्यादा या लंबे इस्तेमाल पर BP बढ़ा सकता है और पोटैशियम घटा सकता है।

मुलेठी गले पर परत बनाकर आराम देती है, और तुलसी गर्माहट और खुशबू देती है। चाय प्राकृतिक रूप से मीठी है, इसलिए चीनी की ज़रूरत नहीं। BP पर मुलेठी के असर के कारण इसे थोड़े दिन ही लें।

सामग्री

  • मुलेठी का 1 छोटा टुकड़ा (2 सेमी)
  • 6 से 8 तुलसी पत्ते
  • 1½ कप पानी

बनाने की विधि

  1. मुलेठी कूटकर तुलसी के साथ पाँच मिनट उबालें।
  2. छान लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • दो-तीन दिन, दिन में दो बार गुनगुनी पिएँ।

मददगार आदतें

  • सूखी पीली डंडियाँ खरीदें; बंद डिब्बे में महीनों चलती हैं।

सावधानियाँ

  • हाई BP, दिल या किडनी की बीमारी और गर्भावस्था में न लें।
  • कुछ दिनों तक ही, थोड़े समय के लिए इस्तेमाल करें।
  • यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अदरक डाल सकते हैं?

हाँ, अदरक का एक टुकड़ा अच्छा रहता है।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

गले का दर्द एक हफ़्ते से ज़्यादा रहे, या तेज़ बुखार, निगलने या साँस लेने में तकलीफ़ हो।

क्या मुलेठी और लिकोरिस कैंडी एक हैं?

नहीं, कैंडी में ज़्यादातर चीनी और स्वाद होता है; मुलेठी सूखी जड़ है।