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सूखी, गुदगुदी वाली खाँसी के लिए मुलेठी और मिश्री

चूसने के लिए मुलेठी का छोटा टुकड़ा, या चुटकी भर मुलेठी चूर्ण मिश्री के साथ — गले में गुदगुदी करती सूखी, परेशान करने वाली खाँसी, ख़ासकर रात की खाँसी, का यह पारंपरिक भारतीय उपाय है।

चित्र में मुलेठी, मिश्री, शहद, बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद सूखी खाँसी (वातज कास: खरखरी, गुदगुदी वाली, कम बलगम, रात में बढ़ने वाली) और गीली खाँसी (कफज: भारी, बलगम वाली) में फ़र्क़ करता है। सूखी खाँसी में मक़सद नमी और आराम देना है, और सुखाना नहीं। मुलेठी (यष्टिमधु — ‘मीठी डंडी’) मीठी, ठंडी और गले पर परत चढ़ाने वाली है, और गायक पीढ़ियों से अपनी आवाज़ बचाने के लिए इसे इस्तेमाल करते आए हैं। मिश्री मिठास और सुकून जोड़ती है।

सामग्री

  • सूखी मुलेठी की 2 इंच की डंडी, या ¼ छोटा चम्मच मुलेठी चूर्ण
  • ¼ छोटा चम्मच पिसी मिश्री
  • चाहें तो चूर्ण मिलाने के लिए ½ छोटा चम्मच शहद या घी

बनाने की विधि

  1. डंडी हो तो धोकर सुखा लें। चूर्ण हो तो मिश्री के साथ मिलाकर शहद या घी से छोटी चटनी जैसा बना लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • गुदगुदी शुरू होते ही मुलेठी की डंडी गाल में रखकर धीरे-धीरे चूसें।
  • या चूर्ण का मिश्रण चम्मच से धीरे-धीरे चाटें, दिन में दो बार तक।
  • एक हफ़्ते से ज़्यादा न लें।

मददगार आदतें

  • बार-बार गुनगुना पानी पिएँ; सूखी हवा और एसी से गुदगुदी वाली खाँसी बढ़ती है।
  • धुएँ, धूल, तेज़ इत्र और बहुत ठंडे पेय से बचें।

सावधानियाँ

  • लंबे समय तक या ज़्यादा मात्रा में मुलेठी बीपी बढ़ा सकती है और पोटैशियम घटा सकती है — हाई बीपी, दिल या किडनी रोग वाले, या पेशाब बढ़ाने वाली दवा, स्टेरॉइड या दिल की दवा लेने वाले डॉक्टर की सहमति के बिना न लें।
  • गर्भावस्था में न लें। एक साल से छोटे बच्चे को शहद न दें; डायबिटीज़ हो तो मिश्री और शहद छोड़ दें।
  • 2–3 हफ़्ते से ज़्यादा खाँसी, खाँसी में ख़ून, साँस फूलना, सीटी जैसी आवाज़, सीने में दर्द, वज़न घटना, रात को पसीना या तेज़ बुखार हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।