मुँह की देखभाल2 मिनट
खाने के बाद सौंफ और लौंग
खाने के बाद थोड़ी सौंफ और एक लौंग चबाएँ, फिर लकड़ी जैसे सख्त टुकड़े थूक दें। यह मसाला दान की मुँह आदत है, दाँतों का इलाज नहीं।

भोजन के बाद सौंफ और एक लौंग
सौंफ और लौंग कई थालियों पर पहले से होते हैं। खाने के बाद चबाने से थोड़ी देर मुँह सुगंधित लगता है। एक लौंग काफी है। मुट्ठी भर लौंग जीभ और पेट पर तीखी पड़ती है।
यह चबाना मैल नहीं हटाता और ब्रश की जगह नहीं लेता। दर्द के साथ मुँह से बदबू आए या दाँत में छेद हो तो दाँतों के डॉक्टर दिखाएँ। छोटे बच्चों को पूरी लौंग चबाने को न दें।
सामग्री
- आधा छोटा चम्मच सौंफ
- 1 लौंग
- पहली चुटकी बहुत कम हो तभी थोड़ी और सौंफ
बनाने की विधि
- सौंफ और एक लौंग को छोटी सूखी कटोरी में साथ रखें।
- कुछ उबाला नहीं जाता। मसाले जैसे हैं वैसे चबाए जाते हैं।
इस्तेमाल का तरीका
- खाने के बाद सौंफ और एक लौंग धीरे चबाएँ।
- रेशे की गांठ निगलने के बजाय सख्त टुकड़े थूक दें।
- एक भोजन के बाद केवल एक लौंग, शाम भर कई नहीं।
मददगार आदतें
- लौंग हल्की फोड़ने पर खुशबू जल्दी आती है, इसलिए कम चबाना पड़ता है।
- लौंग का स्वाद तीखा लगे तो सादे पानी से कुल्ला करके पानी थूक दें।
सावधानियाँ
- कई लौंग न निगलें। यहाँ सीमा एक है।
- मुँह जले या लौंग मसूड़ा खरोचे तो रोक दें।
- यह दाँत के संक्रमण वाली बदबू का इलाज नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कितनी लौंग चबाएँ?
- खाने के बाद थोड़ी सौंफ के साथ एक लौंग। मुट्ठी भर बहुत है।
क्या यह चबाना ब्रश की जगह है?
- नहीं। यह खाने के बाद की छोटी आदत है। ब्रश फिर भी चाहिए, और यह दाँतों का इलाज नहीं।
क्या बच्चे पूरी लौंग चबाएँ?
- नहीं। छोटे बच्चों को पूरी लौंग न दें।



