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जी मिचलाने और सफ़र में उल्टी जैसा लगने पर अदरक और इलायची
घुमावदार रास्ते पर बस में या भारी खाने के बाद जी मिचलाए? नमक लगी अदरक की पतली फाँक, या चबाने के लिए कुटी हुई हरी इलायची — ये मतली के सबसे सौम्य घरेलू उपायों में से हैं।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद में मतली (हृल्लास) को ऐसी स्थिति माना गया है जब नीचे जाने वाली ऊर्जा ऊपर की ओर चलने लगती है — अक्सर पेट भरा होने, पाचन कमज़ोर होने या सफ़र के हिचकोलों से वात बिगड़ने पर। अदरक को ‘विश्वभेषज’ यानी सबकी दवा कहा गया है और पेट ठहराने में इसका लंबा इतिहास है। इलायची ख़ुशबूदार, ताज़गी देने वाली और पेट पर हल्की है, इसलिए जिन्हें अदरक ज़्यादा गरम लगे उनके लिए अच्छी है।
सामग्री
- ताज़ा अदरक की एक पतली फाँक (सिक्के जितनी)
- चुटकी भर सेंधा नमक और कुछ बूँद नींबू
- 2 हरी इलायची
बनाने की विधि
- अदरक की फाँक पर नमक और एक बूँद नींबू डालें।
- इलायची को हल्का कूट लें ताकि दाने दिखने लगें।
इस्तेमाल का तरीका
- जी मिचलाना शुरू होते ही या सफ़र से 15 मिनट पहले अदरक की फाँक धीरे-धीरे चबाएँ।
- या एक इलायची के दाने चबाएँ और छिलका थूक दें।
- पूरा गिलास एक साथ पीने के बजाय पानी या नींबू पानी के छोटे घूँट लें।
मददगार आदतें
- सफ़र में आगे की ओर मुँह करके खिड़की के पास बैठें, दूर क्षितिज की ओर देखें और फ़ोन पर पढ़ने से बचें।
- न भूखे पेट सफ़र करें, न ठूँसकर खाकर — पहले हल्का नाश्ता कर लें।
- ताज़ी हवा और नाक से धीमी साँस लेना बहुत लोगों को राहत देता है।
सावधानियाँ
- गर्भावस्था में हल्की मतली आम है, पर अदरक नियमित लेने से पहले डॉक्टर से पूछें; अगर उल्टी के कारण पानी भी न टिके तो तुरंत इलाज लें।
- एसिडिटी, पित्त की पथरी या ख़ून पतला करने की दवा लेने वालों के लिए ज़्यादा अदरक ठीक नहीं।
- मतली के साथ तेज़ सिरदर्द, सीने में दर्द, बेहोशी-सी, पेट दर्द, पीली आँखें या ख़ून की उल्टी हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।
- बच्चों को बहुत थोड़ी मात्रा दें और बार-बार उल्टी हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें।





