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जटामांसी: फ़ायदे, इस्तेमाल और सुरक्षा

जटामांसी हिमालय की जड़ है जो शांति और बालों के तेल में इस्तेमाल होती है। कैसे इस्तेमाल करें, शोध क्या कहता है और कम क्यों लें।

चित्र में तिल की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

भारतीय घरों में जटामांसी

जटामांसी हिमालय की जड़ है जिसकी मिट्टी जैसी, कस्तूरी जैसी गंध होती है, और आयुर्वेद में इसे शांत करने वाली जड़ी और बालों के तेल में इस्तेमाल किया जाता है। जंगली पौधा संकट में है, इसलिए ज़िम्मेदार विक्रेता से ही लें।

आयुर्वेद में जटामांसी बेचैनी, कम नींद और स्कैल्प के तेलों में इस्तेमाल होती है। जानवरों पर अध्ययनों में शांत करने वाले असर दिखे हैं, पर इंसानों पर शोध कम है।

घर पर इसका इस्तेमाल ज़्यादातर बाहर से होता है, जड़ के कुछ टुकड़े नारियल या तिल के तेल में गर्म करके सिर या पैरों की मालिश। मुँह से लेना वैद्य की सलाह पर ही बेहतर है।

सामग्री

  • 1 बड़ा चम्मच सूखी जटामांसी जड़ के टुकड़े
  • 100 ml नारियल या तिल का तेल

बनाने की विधि

  1. तेल को जड़ के साथ सबसे धीमी आँच पर 10 मिनट गर्म करें; धुआँ न उठने दें।
  2. ठंडा करके छानें और काँच की बोतल में रखें।

इस्तेमाल का तरीका

  • रात को एक छोटा चम्मच तेल स्कैल्प या तलवों पर मलें।
  • हफ़्ते में कुछ बार इस्तेमाल करें।

मददगार आदतें

  • थोड़ी मात्रा ही काफ़ी है; गंध तेज़ होती है।

सावधानियाँ

  • पहले बाँह के अंदर तेल का पैच टेस्ट करें।
  • गर्भावस्था, स्तनपान और नींद की दवाओं के साथ मुँह से न लें।
  • खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जटामांसी महँगी क्यों है?

यह ऊँचाई पर उगती है और जंगली पौधा संकट में है।

क्या जटामांसी तेल रोज़ रात लगा सकते हैं?

हफ़्ते में कुछ रातें काफ़ी हैं; सिर भारी लगे तो धो लें।

क्या जटामांसी और वेलेरियन एक हैं?

नहीं, दोनों अलग पौधे हैं, हालाँकि दोनों शांति के लिए इस्तेमाल होते हैं।