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हड्डियों के अनुकूल खाने के लिए सहजन की फली वाला सांभर
सहजन की फलियों, पत्तियों और दाल से भरा सांभर, हड्डियों और जोड़ों का ध्यान रखने वालों के लिए कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर दक्षिण भारतीय खाना।

मोरिंगा का इस्तेमाल ऐसे क्यों
मोरिंगा (सहजन) के पत्तों में आयरन, कैल्शियम और विटामिन A भरपूर होता है। भारतीय घरों में इन्हें दाल, सांभर और थेपले में पकाया जाता है, और अब सूखे पत्तों का पाउडर भी खूब बिकता है।
सहजन की फली और पत्तियाँ कैल्शियम, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट देती हैं, और दाल जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों के लिए प्रोटीन जोड़ती है। जानवरों पर अध्ययनों में सूजन कम करने के संकेत हैं; इंसानों में इसे पोषक खाने की तरह देखना बेहतर है।
सामग्री
- ½ कप अरहर दाल, पकी हुई
- 2 सहजन की फलियाँ, टुकड़ों में
- ½ कप सहजन पत्तियाँ
- इमली, सांभर मसाला, हल्दी
- राई, करी पत्ते, हींग और तेल
बनाने की विधि
- सहजन की फलियाँ इमली के पानी में सांभर मसाला और हल्दी के साथ पकाएँ।
- दाल और पत्तियाँ डालकर पाँच मिनट उबालें।
- राई, करी पत्ते और हींग का तड़का लगाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- हफ़्ते में दो-तीन बार चावल या मिलेट के साथ खाएँ।
मददगार आदतें
- चटक हरा पाउडर जिसमें सूखे पत्तों जैसी खुशबू हो, ताज़ा है।
सावधानियाँ
- ख़ून पतला करने वाली दवा लेते हों तो सहजन की मात्रा बहुत ऊपर-नीचे न करें, एक जैसी रखें।
- मोरिंगा की जड़ और छाल न लें; खाने में सिर्फ़ पत्ते और फलियाँ ली जाती हैं।
- थायरॉइड या शुगर की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
- यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह गठिया के दर्द में मदद करता है?
- यह पोषक खाना है, दर्द का इलाज नहीं।
सहजन की फली कैसे खाएँ?
- नरम गूदा और बीज चूसकर खाएँ और रेशेदार छिलका छोड़ दें।
दिन में कितना मोरिंगा पाउडर?
- खाने में आधा से एक छोटा चम्मच काफ़ी है।




