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दोपहर की सुस्ती के लिए सहजन पत्ती की चाय
दोपहर में बिना कैफ़ीन का सहजन पत्ती की चाय का कप, तीसरी चाय का हल्का, घास जैसा विकल्प।

मोरिंगा के बारे में ज़रूरी बातें
मोरिंगा (सहजन) के पत्तों में आयरन, कैल्शियम और विटामिन A भरपूर होता है। भारतीय घरों में इन्हें दाल, सांभर और थेपले में पकाया जाता है, और अब सूखे पत्तों का पाउडर भी खूब बिकता है।
सहजन पत्ती की चाय में कैफ़ीन नहीं होता, इसलिए यह देर की चाय की तरह नींद नहीं बिगाड़ती। यह थोड़े खनिज और एंटीऑक्सीडेंट देती है। दोपहर की सुस्ती अक्सर कम पानी, भारी लंच और कम हलचल से होती है, इसलिए चाय के साथ छोटी सैर करें।
सामग्री
- 1 छोटा चम्मच सूखी सहजन पत्तियाँ या ½ छोटा चम्मच पाउडर
- 1 कप गर्म (उबलता नहीं) पानी
- नींबू या पुदीने का पत्ता (चाहें तो)
बनाने की विधि
- तीन से पाँच मिनट भिगोएँ; पत्तियाँ हों तो छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- दोपहर के बीच में पिएँ।
- साथ में पाँच मिनट टहलें या स्ट्रेच करें।
मददगार आदतें
- चटक हरा पाउडर जिसमें सूखे पत्तों जैसी खुशबू हो, ताज़ा है।
सावधानियाँ
- सहजन की जड़ और छाल न लें। गर्भावस्था में या थायरॉइड या डायबिटीज़ की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
- मोरिंगा की जड़ और छाल न लें; खाने में सिर्फ़ पत्ते और फलियाँ ली जाती हैं।
- थायरॉइड या शुगर की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
- यह पारंपरिक इस्तेमाल है; वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उबलता पानी क्यों नहीं?
- बहुत गर्म पानी से यह ज़्यादा कड़वी होती है।
क्या स्वाद अच्छा होता है?
- ग्रीन टी जैसा घास वाला; नींबू या पुदीना मदद करता है।
दिन में कितना मोरिंगा पाउडर?
- खाने में आधा से एक छोटा चम्मच काफ़ी है।




