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बैठी आवाज़ के लिए मुलेठी की डंडी चबाना

मुलेठी की डंडी का छोटा टुकड़ा मुँह में रखकर धीरे-धीरे चबाना, थकी, बैठी आवाज़ के लिए गायकों और शिक्षकों का पारंपरिक उपाय।

चित्र में मुलेठी, बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

आयुर्वेद में मुलेठी

मुलेठी (यष्टिमधु) स्वाद में मीठी और गले को आराम देने वाली होती है, इसीलिए गले के नुस्खों में आती है। इसमें ग्लाइसिराइज़िन होता है, जो ज़्यादा या लंबे इस्तेमाल पर BP बढ़ा सकता है और पोटैशियम घटा सकता है।

कई शास्त्रीय गायक जेब में मुलेठी का टुकड़ा रखते हैं। इसका मीठा रस गले को आराम देता है। इसे कभी-कभार ही लें; रोज़ मुलेठी लेने से BP बढ़ सकता है।

सामग्री

  • मुलेठी की डंडी का 1 छोटा टुकड़ा (2 से 3 सेमी)

बनाने की विधि

  1. डंडी धोकर सुखाएँ; छोटा टुकड़ा तोड़ लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • 10 से 15 मिनट धीरे-धीरे चबाकर रस चूसें; रेशे थूक दें।
  • आवाज़ थकी हो तब एक-दो दिन इस्तेमाल करें।

मददगार आदतें

  • सूखी पीली डंडियाँ खरीदें; बंद डिब्बे में महीनों चलती हैं।

सावधानियाँ

  • हाई BP, दिल या किडनी की समस्या या गर्भावस्था में न लें।
  • हाई BP, दिल या किडनी की बीमारी और गर्भावस्था में न लें।
  • कुछ दिनों तक ही, थोड़े समय के लिए इस्तेमाल करें।
  • यह पारंपरिक इस्तेमाल है; वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गाने से पहले रोज़ मुलेठी चबा सकते हैं?

आवाज़ को आराम देना और मुलेठी कभी-कभार लेना बेहतर है।

क्या यह गले के दर्द में भी मदद करती है?

हाँ, खराश वाले गले को आराम दे सकती है।

क्या मुलेठी और लिकोरिस कैंडी एक हैं?

नहीं, कैंडी में ज़्यादातर चीनी और स्वाद होता है; मुलेठी सूखी जड़ है।