पाचन5 मिनट
दोपहर के भोजन के बाद मिठाई का एक छोटा टुकड़ा, रात को नहीं
दिवाली के हफ़्ते में रात को कई टुकड़ों की जगह दोपहर के भोजन के बाद घर की बर्फ़ी या लड्डू का एक छोटा टुकड़ा और थोड़ी सैर। हिस्से की आदत है, डाइट नहीं।

मिठाई दोपहर में आसान रहती है
दिवाली की मिठाई त्योहार का हिस्सा है, उससे बचने की ज़रूरत नहीं। दोपहर में पाचन आमतौर पर मज़बूत रहता है, इसलिए रात में कई टुकड़ों की जगह दोपहर के भोजन के बाद एक छोटा टुकड़ा ज़्यादा आराम से पचता है।
एक टुकड़ा चुनें, धीरे-धीरे खाएँ और दस मिनट टहलें। बाकी डिब्बा बंद रखें। यह हिस्से की आदत है, किसी बीमारी का इलाज नहीं।
सामग्री
- घर की बर्फ़ी का एक छोटा टुकड़ा या एक लड्डू
- एक गिलास सादा पानी
बनाने की विधि
- बर्फ़ी पहले से छोटे टुकड़ों में काट लें।
- पहला टुकड़ा खाने के बाद मिठाई का डिब्बा नज़र से दूर रखें।
इस्तेमाल का तरीका
- टुकड़ा दोपहर के भोजन के तुरंत बाद लें, रात के खाने के बाद नहीं।
- बाद में दस मिनट धीरे-धीरे टहलें।
मददगार आदतें
- बैठकर और बिना स्क्रीन के आराम से खाएँ।
- मेहमानों को मिठाई के साथ फल या सूखे मेवे भी दें।
सावधानियाँ
- मधुमेह वाले अपने भोजन-योजना का पालन करें और मिठाई के बारे में डॉक्टर से पूछें।
- अम्लता या पेट फूलने पर मिठाई छोड़ दें।
- हिस्से की आदत है, इलाज नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दिवाली पर मिठाई खाना गलत है?
- नहीं। ज़्यादातर लोगों के लिए सही समय पर छोटा हिस्सा काफ़ी है।
दोपहर में ही क्यों, रात में क्यों नहीं?
- दिन के बीच में पाचन आमतौर पर मज़बूत होता है।
क्या बच्चे भी यह अपना सकते हैं?
- हाँ, भोजन के बाद एक छोटा टुकड़ा बच्चों के लिए भी अच्छी आदत है।




