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शल्लकी (बोसवेलिया): जोड़ों के लिए फ़ायदे और इस्तेमाल

शल्लकी आयुर्वेदिक गोंद है जिस पर घुटने के आर्थराइटिस के लिए शोध हुआ है। प्रमाण क्या दिखाते हैं, कैसे ली जाती है और किसे बचना चाहिए।

कटोरी, गिलास और पारंपरिक बर्तनों का आयुर्वेदिक रसोई चित्र।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

शल्लकी का इस्तेमाल ऐसे क्यों

शल्लकी (बोसवेलिया) एक गोंद है जिसे आयुर्वेद जोड़ों के आराम के लिए इस्तेमाल करता है। कुछ अध्ययनों में घुटने के आर्थराइटिस में हल्के आराम के संकेत हैं; इसे घर पर नहीं, मानक गोलियों के रूप में लिया जाता है।

शल्लकी सदियों से आयुर्वेद में जोड़ों की जड़ी के रूप में इस्तेमाल होती रही है। मानक बोसवेलिया अर्क के कई छोटे अध्ययनों में एक से तीन महीनों में घुटने के दर्द और अकड़न में कमी बताई गई है, हालाँकि अध्ययनों की गुणवत्ता अलग-अलग है।

यह सबसे अच्छा तब काम करती है जब वज़न नियंत्रण, मांसपेशियों के व्यायाम और डॉक्टर की देखरेख वाली योजना का हिस्सा हो, अकेले इलाज के रूप में नहीं।

सामग्री

  • मानक शल्लकी गोलियाँ या कैप्सूल
  • पानी

बनाने की विधि

  1. डॉक्टर से बात करें, ख़ासकर अगर दर्द निवारक या खून पतला करने की दवा लेते हों।
  2. ऐसा उत्पाद चुनें जिस पर बोसवेलिक एसिड की मात्रा लिखी हो।

इस्तेमाल का तरीका

  • लेबल के अनुसार खाने के बाद लें।
  • छह से आठ हफ़्ते बाद देखें; फ़ायदा न हो तो बंद करें।

मददगार आदतें

  • ऐसे उत्पाद चुनें जिन पर बोसवेलिक एसिड की मात्रा लिखी हो।

सावधानियाँ

  • एसिडिटी, मतली या दाने हों तो बंद करें।
  • पेट खराब कर सकती है; गर्भावस्था में न लें और खून पतला करने या दर्द-सूजन की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
  • यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कच्चा शल्लकी गोंद चबा सकते हैं?

नहीं; जाँचे हुए, मानक उत्पाद ही लें।

क्या शल्लकी लोबान है?

यह भारतीय लोबान है, बोसवेलिया सेराटा पेड़ से।

शल्लकी कितने समय में असर करती है?

अध्ययनों में फ़ायदा चार से आठ हफ़्तों बाद दिखा।