रोग प्रतिरोधक क्षमता10 मिनट
हफ़्ते में दो बार ताज़ी हल्दी और अदरक का शॉट
ताज़ी हल्दी और अदरक की जड़ नींबू, काली मिर्च और पानी के साथ पीसकर बना छोटा, तीखा शॉट, सर्दियों में नाश्ते के बाद।

आयुर्वेद में हल्दी
हल्दी भारतीय रसोई का रोज़ का पीला मसाला है। इसका मुख्य तत्व करक्यूमिन अकेले शरीर में कम सोखा जाता है, इसीलिए पारंपरिक नुस्खों में इसे घी या दूध जैसी चिकनाई और चुटकी भर काली मिर्च के साथ लिया जाता है।
सर्दियों में भारतीय बाज़ारों में ताज़ी कच्ची हल्दी आती है। अदरक, नींबू और चुटकी भर काली मिर्च के साथ पीसने पर यह चटक, तीखा शॉट बनता है। खाने के बाद और हफ़्ते में सिर्फ़ दो बार लेने से यह पेट पर हल्का रहता है।
सामग्री
- 1 इंच ताज़ी हल्दी
- 1 इंच अदरक
- ½ नींबू
- चुटकी भर काली मिर्च
- ½ कप पानी
- 1 छोटा चम्मच शहद (चाहें तो)
बनाने की विधि
- जड़ें छीलकर काटें; पानी के साथ पीसकर छान लें।
- नींबू का रस, काली मिर्च और शहद मिलाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- नाश्ते के बाद छोटा शॉट (लगभग 30 ml), हफ़्ते में दो बार पिएँ।
- बचा हुआ फ्रिज में सिर्फ़ एक दिन रखें।
मददगार आदतें
- साबुत हल्दी या भरोसेमंद ब्रांड लें; खुला चटक पाउडर मिलावटी हो सकता है।
सावधानियाँ
- ताज़ी हल्दी हाथों और स्लैब पर दाग छोड़ती है; दस्ताने पहनें।
- ज़्यादा मात्रा से पेट खराब हो सकता है; खून पतला करने की दवा लेते हों या पित्त की पथरी हो तो डॉक्टर से पूछें।
- यह पारंपरिक इस्तेमाल है; वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हल्दी पाउडर ले सकते हैं?
- हाँ, ½ छोटा चम्मच, हालाँकि ताज़ी जड़ का स्वाद ज़्यादा चटक है।
क्या यह जोड़ों के लिए अच्छा है?
- जोड़ों के दर्द में हल्दी के हल्के प्रमाण हैं; यह दर्द की दवा की जगह नहीं।
क्या हल्दी दाग छोड़ती है?
- हाँ, त्वचा, नाखून और कपड़े पर; त्वचा से एक-दो दिन में हल्का हो जाता है।





