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एसिडिटी और सीने की जलन के लिए आँवला-मिश्री
आँवला चूर्ण और मिश्री को ठंडे-सामान्य पानी के साथ लेना एसिडिटी की जलन, खट्टी डकारों और बेचैनी को शांत करने का पुराना घरेलू तरीका है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद में एसिडिटी यानी अम्लपित्त को पेट में बढ़ा हुआ, ज़्यादा गरम और तीखा पित्त माना गया है। देर रात तक जागना, खाना छोड़ना, तली-मसालेदार चीज़ें, खाली पेट कड़क चाय और तनाव — ये सब इसे बढ़ाते हैं।
आँवले की ख़ासियत यह है कि स्वाद में खट्टा होने पर भी पचने के बाद इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए सदियों से यह पित्त शांत करने के लिए इस्तेमाल होता आया है। मिश्री इसमें मिठास और ठंडक जोड़ती है। यह तुरंत असर वाली दवा नहीं, बल्कि रसोई के स्तर का सौम्य उपाय है।
सामग्री
- ½ छोटा चम्मच आँवला चूर्ण, या 1 बड़ा चम्मच ताज़ा आँवला रस
- ½ छोटा चम्मच पिसी मिश्री
- आधा गिलास सामान्य तापमान का पानी (बर्फ़ीला नहीं)
बनाने की विधि
- एक छोटी कटोरी में आँवला चूर्ण और मिश्री मिला लें।
- पीने से ठीक पहले पानी में घोलें; ताज़ा आँवला रस हो तो उसे भी इसी तरह पतला कर लें।
इस्तेमाल का तरीका
- दिन में एक बार, दोपहर के खाने से 20–30 मिनट पहले, दो हफ़्ते तक लें।
- खाने के बाद जलन उठे तो ठंडे (फ्रिज वाले नहीं) दूध या नारियल पानी के कुछ घूँट भी आराम देते हैं।
मददगार आदतें
- खाना तय समय पर खाएँ — लंबा अंतराल और फिर भारी भोजन एसिडिटी का आम कारण है।
- खाली पेट चाय-कॉफ़ी, अचार, तली चीज़ें और बहुत देर से रात का खाना कम करें।
- रात के खाने के बाद दो-तीन घंटे लेटें नहीं, और रात में खट्टा पानी ऊपर आए तो पलंग का सिरहाना थोड़ा ऊँचा कर लें।
सावधानियाँ
- डायबिटीज़ हो तो मिश्री न डालें या पहले डॉक्टर से पूछें।
- कुछ लोगों में आँवले से दस्त ढीले हो सकते हैं; ऐसा हो तो मात्रा घटा दें।
- बार-बार एसिडिटी, निगलने में दिक़्क़त, उल्टी, काला मल, वज़न घटना या सीने में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ — दिल का दर्द भी कभी-कभी एसिडिटी जैसा लगता है।
- डॉक्टर की दी हुई एसिडिटी या अल्सर की दवा अपने मन से बंद न करें।




