मुख्य सामग्री पर जाएँ
AllAyurvedics

बलगम वाली खाँसी में शहद के साथ गुनगुना पान का पत्ता

सादा पान का पत्ता तवे पर गुनगुना करके, उसका रस शहद में मिलाकर, बड़ों की बलगम वाली खाँसी में एक-दो दिन। सुपारी, चूना या तंबाकू नहीं।

चित्र में शहद, नींबू, बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

पान का पत्ता का इस्तेमाल ऐसे क्यों

सादा पान का पत्ता गर्म और खुशबूदार होता है। आयुर्वेद में इसे गुनगुना करके छाती पर और शहद के साथ खाँसी में, बिना सुपारी, चूने या तंबाकू के इस्तेमाल किया जाता था।

पान का पत्ता बंगाल और दक्षिण भारत में खाँसी का पारंपरिक उपाय है। पत्ता गुनगुना करने से नरम होता है और रस निकालना आसान होता है। सिर्फ़ सादा पत्ता लें; पान में मिलाई जाने वाली चीज़ें नुकसानदेह हैं।

सामग्री

  • 1 ताज़ा पान का पत्ता
  • 1 छोटा चम्मच शहद

बनाने की विधि

  1. पत्ते को सूखे तवे पर दोनों तरफ़ कुछ सेकंड गुनगुना करें।
  2. कुचलकर रस निचोड़ें; शहद में मिलाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • एक-दो दिन, दिन में एक-दो बार धीरे-धीरे लें।

मददगार आदतें

  • ताज़े, चमकदार, बिना दाग वाले पत्ते चुनें।

सावधानियाँ

  • साँस फूलना, सीने में दर्द या तीन दिन से ज़्यादा बुखार हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।
  • सुपारी, तंबाकू या गुटखा कभी न मिलाएँ; इनसे कैंसर होता है।
  • यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गुनगुना पत्ता छाती पर रख सकते हैं?

हाँ, कुछ परिवार सरसों तेल लगा गुनगुना पत्ता छाती पर रखते हैं; ध्यान रखें ज़्यादा गर्म न हो।

क्या यह बच्चों के लिए ठीक है?

पहले बच्चों के डॉक्टर से पूछें।

क्या सादा पान का पत्ता सुरक्षित है?

थोड़ी मात्रा में सादा पत्ता पारंपरिक खाना है; नुकसान मिलाई गई चीज़ों से होता है।