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बैठे गले के लिए काली मिर्च और घी का अवलेह

गुनगुने घी में बारीक पिसी काली मिर्च की चुटकी और थोड़ी मिश्री, बड़ों के बैठे, दर्द वाले गले के लिए धीरे-धीरे चाटें।

चित्र में काली मिर्च, मिश्री की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

काली मिर्च का इस्तेमाल ऐसे क्यों

काली मिर्च तीखी और गर्म होती है। इसका तत्व पिपेरिन हल्दी के करक्यूमिन को शरीर में सोखने में मदद करता है, और आयुर्वेद इसे थोड़ी मात्रा में भूख और जकड़न के लिए इस्तेमाल करता है।

घी और मिश्री के साथ काली मिर्च बैठे गले का पुराना दादी-नानी का नुस्खा है, ख़ासकर ज़्यादा बोलने या गाने के बाद। घी परत बनाता है और काली मिर्च गर्माहट देती है।

सामग्री

  • बारीक पिसी काली मिर्च की चुटकी
  • ½ छोटा चम्मच घी
  • पिसी मिश्री की चुटकी

बनाने की विधि

  1. घी हल्का गुनगुना करके काली मिर्च और मिश्री मिलाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • दो दिन, दिन में एक-दो बार धीरे-धीरे चाटें।
  • आवाज़ को आराम दें और गुनगुना पानी पिएँ।

मददगार आदतें

  • काली मिर्च ताज़ी पीसें; बना-बनाया पाउडर जल्दी खुशबू खो देता है।

सावधानियाँ

  • दो हफ़्ते से ज़्यादा आवाज़ बैठी रहे तो ENT डॉक्टर को दिखाएँ।
  • ज़्यादा मात्रा से पेट और गले में जलन हो सकती है।
  • खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घी क्यों?

यह गले पर परत बनाता है और काली मिर्च को सौम्य करता है।

क्या मिश्री की जगह शहद ले सकते हैं?

हाँ, बड़ों और एक साल से बड़े बच्चों के लिए।

चुटकी भर काली मिर्च कितनी होती है?

लगभग दो-तीन कुटी हुई काली मिर्च।