महिला स्वास्थ्य5 मिनट
रजोनिवृत्ति के आसपास एक चम्मच भुनी अलसी
रोज़ एक से दो बड़े चम्मच भुनी, पिसी अलसी दही, रोटी या स्मूदी में, मध्य उम्र की महिलाओं के लिए रेशे से भरपूर खाने की आदत।

भारतीय घरों में अलसी
अलसी से घुलनशील फ़ाइबर और पौधों वाला ओमेगा-3 मिलता है। पिसे बीज साबुत बीजों से बेहतर पचते हैं, साबुत बीज अक्सर बिना पचे निकल जाते हैं।
अलसी में लिग्नन होते हैं, पौधों के ऐसे तत्व जिनका एस्ट्रोजन जैसा हल्का असर होता है। गर्मी की लहरों पर अध्ययन मिले-जुले हैं, पर अलसी पक्के तौर पर रेशा और ओमेगा-3 देती है, जो दिल की सेहत और पेट साफ़ रहने में मदद करते हैं, दोनों रजोनिवृत्ति के बाद ज़रूरी हैं।
सामग्री
- 1 से 2 बड़े चम्मच भुनी अलसी, ताज़ी पिसी
बनाने की विधि
- अलसी सूखी भूनें, ठंडी करके थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीसें।
इस्तेमाल का तरीका
- दिन में एक बार दही, दाल या सलाद पर छिड़कें, या आटे में मिलाएँ।
- एक गिलास पानी ज़्यादा पिएँ।
मददगार आदतें
- थोड़ा-थोड़ा पीसें और पाउडर फ्रिज में रखें; यह जल्दी बासी होता है।
सावधानियाँ
- हार्मोन से जुड़ा कैंसर हो तो डॉक्टर से पूछें। दवाओं से दो घंटे का अंतर रखें।
- इसके साथ पर्याप्त पानी पिएँ; पेट फूलने से बचने के लिए कम मात्रा से शुरू करें।
- गर्भावस्था या स्तनपान में पहले डॉक्टर से पूछें।
- खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
साबुत या पिसी?
- पिसी; साबुत बीज बिना पचे निकल जाते हैं।
क्या यह HRT की जगह ले सकती है?
- नहीं; यह खाने की आदत है। इलाज के विकल्प स्त्री रोग विशेषज्ञ से पूछें।
दिन में कितनी अलसी?
- ज़्यादातर बड़ों के लिए एक से दो छोटे चम्मच पिसी अलसी काफ़ी है।


